संयुक्त राष्ट्र की शीर्ष इकाइयों में शामिल- यूनेस्को ने गुजरात के पारंपरिक गरबा डांस को सांस्कृतिक धरोहर माना है। यूनेस्को ने गरबा डांस को दुनियाभर में गौरवशाली उपलब्धि मानी जाने वाली सूची में शामिल किया है। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल ने बुधवार को कहा, UNESCO ने 'मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची' में गरबा डांस को शामिल करने को मंजूरी दे दी है।
गौरतलब है कि भारत ने नवरात्रि उत्सव के दौरान पूरे गुजरात समेत देश के कई अन्य हिस्सों में लोकप्रिय- गरबा डांस को UNESCO की सूची में शामिल करने के लिए नॉमिनेट किया था। बुधवार को यूनेस्को के फैसले के बाद गुजरात के मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया हैंडल- एक्स पर जारी एक बयान में लिखा, गरबा के रूप में देवी मां की भक्ति की सदियों पुरानी परंपरा न केवल जीवित है, बल्कि इसे आगे भी बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गुजरात की पहचान बन चुके गरबा को यूनेस्को ने अपनी अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा, गरबा का यूनेस्को की सूची में शामिल होना दुनिया भर में फैले गुजरातियों के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की विरासत को महत्व दिए जाने का उदाहरण है। सीएम पटेल ने कहा, गुजरात का सांस्कृतिक गौरव- गरबा पीएम मोदी की लीडरशिप में दुनियाभर में लोकप्रिय हुआ है। उन्होंने गुजरात के लोगों को इस कामयाबी पर बधाई भी दी।
गौरतलब है कि मंगलवार को दक्षिण अफ्रीकी देश बोत्सवाना में अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा के लिए बनाई गई यूनेस्को की अंतर सरकारी समिति की 18वीं बैठक शुरू हुई। इस दौरान अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (Intangible Cultural Heritage या आईसीएच) की सुरक्षा के लिए 2003 कन्वेंशन के तहत गरबा डांस को यूनेस्को की सूची में शामिल करने का एलान किया गया।
यूनेस्को की तरफ से जारी बयान में गरबा डांस को लेकर कहा गया, गुजरात का गरबा सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल होने के मामले में भारत की 15वीं आईसीएच प्रविष्टि है। सूची में शामिल किया जाना एकीकृत शक्ति के रूप में गरबा की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है। गरबा सामाजिक और लैंगिक समावेशिता को बढ़ावा देता है। यूनेस्को ने स्वीकार किया कि एक डांस शैली के रूप में गरबा विधि-विधान या कर्मकांड (ritualistic) और भक्ति की जड़ों में गहराई से समाया हुआ है। इसमें कई देशों के लोग शामिल हैं। यूनेस्को के अनुसार, जीवन के सभी क्षेत्रों में गरबा समुदायों को एक साथ लाने वाली एक जीवंत परंपरा के रूप में विकसित हो रही है।
बयान के अनुसार, गरबा सामाजिक-आर्थिक, लिंग और धार्मिक संरचनाओं को कमजोर करके सामाजिक समानता को बढ़ावा देता है। इस डांस फॉर्म में हाशिए पर रहने वाले समुदायों के शामिल होने से सामाजिक बंधन मजबूत हो रहे हैं। बता दें कि भारत की परंपराओं और संस्कृति से जुड़ी- रामलीला, वैदिक मंत्रोच्चार, कुंभ मेला और दुर्गा पूजा को पहले ही यूनेस्को की धरोहर सूची में शामिल किया जा चुका है।