कचरा प्रबंधन की सही व्यवस्था ना होने और भारी यातायत और उससे निकलने वाले धुंए से जहरीली हवा का स्तर ज्यादा हो गया है। यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने पार्टिकुलेट मैटर - हवा में मौजूद खतरनाक बारीक कण से मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को रेखांकित करते हुए बताया है कि इससे बच्चों के मस्तिष्क का विकास रुक जाता है, ह्रदय रोग होने की आशंका बढ़ती है, और फेफड़ों का कैंसर होने का खतरा पैदा होता है।
दुनिया में हर 10 में से 9 व्यक्ति जिस हवा में सांस लेते हैं वह स्वास्थ्य के लिए अनुकूल नहीं है। एक अनुमान के अनुसार वायु प्रदूषण से हर साल 70 लाख असामयिक मौतें हो रही हैं जिनमें छह लाख से ज्यादा बच्चे हैं।
यूएन पर्यावरण एजेंसी दिल्ली सहित अन्य इलाकों में प्रदूषण और जहरीली हवा से निपटने के लिए कई सैक्टरों से मिलकर काम कर रही है। इसके तहत सरकार के नेतृत्व में कृषि संबंधी पहल शुरू की गई हैं और पराली जलाने की नुकसानदेह परंपरा की रोकथाम के लिए परियोजना चलाई जा रही है।