संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने शैक्षणिक संस्थाओं के बड़े स्तर पर बंद रहने को लेकर चिंता जताई है। एजेंसियों ने बंद के कारण बच्चों की पढ़ाई और उनके कल्याण को अप्रत्याशित खतरा होने को लेकर सचेत किया। इस दौरान स्कूलों को फिर से खोलने को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
बता दें कि कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण दुनियाभर में लॉकडाउन लागू है, जिसके कारण सभी जगह स्कूल और कॉलेज बंद हैं।
यूनेस्को, यूनिसेफ, विश्व बैंक और विश्व खाद्य कार्यक्रम की तरफ से तैयार दिशा-निर्देशों के मुताबिक, "राष्ट्रीय और स्थानीय प्राधिकारियों को स्कूल फिर से खोलने का फैसला बच्चों के हित और सार्वजनिक स्वास्थ्य के संबंध में समग्र विवेचना को ध्यान में रखकर करना चाहिए। यह विवेचना शिक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामाजिक-आर्थिक कारक से जुड़े फायदों और जोखिमों के आकलन पर आधारित होनी चाहिए।"
एजेंसियों की तरफ से जारी दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि स्कूल बंद करने का कोरोना वायरस के संक्रमण की दर पर क्या असर हुआ है, इसका आकलन करने के लिए अभी पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं, लेकिन बच्चों की सुरक्षा और उनके सीखने की प्रक्रिया में स्कूल बंद होने के दुष्प्रभाव के बारे में लिखित प्रमाण मौजूद हैं।
इनमें चिंता जताते हुए कहा गया है कि हाल के दशकों में बच्चों की शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने में जो सफलता मिली है, वो स्कूल बंद होने के कारण बर्बाद हो सकता है।