भारत में ब्रिटेन के उच्चायुक्त फिलिप बार्टन ने कहा है कि भारत और ब्रिटेन एंटी-माइक्रोबियल प्रतिरोध (एएमआर) से निपटने के लिए पांच नई परियोजनाओं के साथ अपने मौजूदा वैज्ञानिक अनुसंधान सहयोग को और बढ़ाना चाहता है। उन्होंने कहा कि हमारा यह कदम एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी बैक्टीरिया और जीन के खिलाफ वैश्विक लड़ाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
इससे आगे उन्होंने कहा कि ब्रिटेन (यूके) अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के लिए यूके रिसर्च एंड इनोवेशन फंड से 40 लाख पाउंड का योगदान दे रहा है और भारत भी अपने स्वयं के संसाधनों से 40 लाख पाउंड सहयोग राशि के रूप में देगा। यानि दोनो देश कुल मिलाकर 80 लाख पाउंड इन परियोजनाओं पर खर्च करेंगे।
इन परियोजनाओं पर काम सितंबर में शुरू होने की संभावना है। इस फंड की घोषणा दक्षिण एशिया और कॉमनवेल्थ के राज्य मंत्री लॉर्ड तारिक अहमद ने किया। तारिक अहमद ने कहा कि भारत एंटी-माइक्रोबियल के उत्पादन में अग्रणी है और यह इन परियोजनाओं को सफल बनाने में बहुत मदद करेगा।
उन्होंने आगे कहा कि सीरम इंस्टीट्यूट और भारत के बीच कई समझौते हुए हैं और ब्रिटेन अब भारत का दूसरा सबसे बड़ा रिसर्च पार्टनर है। अगले साल हम रिसर्च पार्टनरशिप में 40 करोड़ पाउंड निवेश करने जा रहे हैं।
कॉमनवेल्थ राज्य मंत्री तारिक अहमद कोल्ड-चेन प्रौद्योगिकी पर भारत और ब्रिटेन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वर्चुअल राउंडटेबल की अध्यक्षता भी करेंगे। इसके बाद वे गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी और विदेश राज्य मंत्री एवं संसदीय कार्य मंत्री वी मुरलीधरन से भी बात करेंगे।