उज्जैन कुंभ का दूसरा शाही स्नान चल रहा है। इस स्नान में एक के बाद एक 13 अखाड़े क्षिप्रा के तट पर डुबकी लगा रहे हैं।
संन्यासियों और बैरागियों के स्नान अलग-अलग घाटों पर हो रहे हैं। अखाड़ों के शाही जुलूस प्रात: काल से ही निकलने लगे हैं। दोपहर बाद दो बजे संतों का स्नान संपन्न हो जाएगा और जनता का स्नान शुरू होगा।
उज्जैन कुंभ का इसके बाद केवल एक शाही स्नान शेष रह जाएगा। सोमवार को स्नानों की व्यापक व्यवस्था की गई है।
इससे पहले अखाड़ा परिषद राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरी ने बताया था कि पिछले दिनों आए तूफान में बिगड़ी तमाम व्यवस्थाएं फिर से सुचारु हो गई हैं। संतों के जिन क्षेत्रों में तंबू गिर गए थे, उन्हें खड़ा किया जा चुका है। अब कोई भी खुले आसमान के नीचे रात नहीं बिता रहा। प्रशासन के साथ तय हुए क्रम के अनुसार घाटों पर स्नान की व्यवस्था की गई है।
उज्जैन में विगत 22 अप्रैल से कुंभ का मेला सुचारू रूप से चल रहा है। दूसरा शाही स्नान करने लिए हरिद्वार के अखाड़े और आश्रमों से बड़ी संख्या में संत महाकाल की नगरी में उपस्थित हैं। हरिद्वार से अनेक श्रद्घालु भी कुंभ नहाने गए हैं।
श्रीमहंत हरि गिरी ने बताया कि संन्यासियों के अखाड़ों में उत्तर भारत के निवासियों की संख्या अधिक है। पहले शाही स्नान पर बैरागियों के दो अखाड़ों ने अव्यवस्था का आरोप लगाकर स्नान का बहिष्कार किया था। इस बार कोई संकट नहीं है और सभी 13 अखाड़े कुंभ के अमृत जल में स्नान करेंगे।