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महाराष्ट्र: अलसुबह टूटा उद्धव ठाकरे का सीएम बनने का सपना

Sat, 23 Nov 2019 10:38 AM IST
योगेश साहू न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
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उद्धव व आदित्य ठाकरे - फोटो : पीटीआई
महाराष्ट्र में करीब एक महीने बाद सरकार गठन को लेकर स्थिति बड़े राजनीतिक उलटफेर के साथ शनिवार को स्पष्ट हो गई। अलसुबह एक ओर जहां भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। वहीं दूसरी ओर इसके साथ ही शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे का मुख्यमंत्री बनने का सपना टूटा गया। हालांकि उनसे पहले उनके बेटे आदित्य ठाकरे का नाम सीएम पद की दौड़ में आगे चल रहा था।



दरअसल, शनिवार सुबह से पहले तक महाराष्ट्र में शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के गठबंधन से सरकार बनने की स्थिति स्पष्ट होती दिख रही थी। इसका औपचारिक एलान होना भर रह गया था। हालांकि सरकार बानाने का दावा रविवार या सोमवार को राज्यपाल से मुलाकात कर किया जाना था। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे राज्य के अगले मुख्यमंत्री बनाए जाने थे। उनके नाम पर सहमति तीनों दलों के शीर्ष नेताओं की शुक्रवार को हुई बैठक में बन गई थी।

क्या हुआ था उस बैठक में...
मुंबई के नेहरू सेंटर में तीन दलों के वरिष्ठ नेताओं की करीब दो घंटे से अधिक वक्त तक चली थी। बैठक में सरकार गठन, विभागों के बंटवारे आदि पर चर्चा हुई। बैठक के बाद बाहर निकले एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने कहा भी था कि बैठक में सरकार गठन को लेकर चर्चा हुई। हमारी पहली प्राथमिकता है कि सरकार पूरे पांच साल तक चले। सरकार के नेतृत्व को लेकर भी बात हुई और उद्धव ठाकरे के नाम पर तीनों दलों में सहमति बन गई है। 

यह भी पढ़ें: शिवसेना-कांग्रेस और एनसीपी को भनक तक नहीं लगी और भाजपा ले उड़ी सीएम की कुर्सी
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कांग्रेस-एनसीपी बैठक - फोटो : ANI
शनिवार को यूं स्पष्ट हो जाती स्थिति
  • राजनीतिक गलियारों में हो रही हलचल के दौरान कहा जा रहा था कि पांच साल तक उद्धव ही मुख्यमंत्री बने रहेंगे। हालांकि शरद पवार का ये भी कहना था कि अभी कुछ मुद्दों पर बात बाकी है। इसे लेकर शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस भी होनी थी, जिसमें स्थिति साफ हो जाती है।
  • वहीं उद्धव ने बैठक को लेकर कहा था कि सकारात्मक चर्चा हुई। हम नहीं चाहते कि तीनों पार्टियों के बीच किसी भी मुद्दे पर बाद में कोई गतिरोध हो। हालांकि उन्होंने सीएम पद को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की। 
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कांग्रेस-एनसीपी बैठक - फोटो : ANI
शिवसेना नेता के बयान ने फैलाया भ्रम
  • वहीं दूसरी ओर शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे के एक बयान ने सीएम पद को लेकर भ्रम की स्थिति बना दी थी। उन्होंने कहा था कि मुख्यमंत्री पद का नाम उद्धव ठाकरे ही तय करेंगे। साथ ही उन्होंने यह भी कह दिया था कि तीनों दलों के बीच अभी कई मुद्दों पर चर्चा होना बाकी है।
  • इस बीच एनसीपी के प्रवक्ता नवाब मलिक ने भी कहा कि किसी भी सरकार को चलाने के लिए एक चेहरा चाहिए और एनसीपी की तरफ से उद्धव ठाकरे के नाम पर पूरी सहमति है। उद्धव एनसीपी की पहली पसंद हैं।

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राज्यपाल से मिलने पहुंचे आदित्य ठाकरे - फोटो : एएनआई
विधानसभा अध्यक्ष पर था गतिरोध, विभागों पर बन गई थी बात
  • राजनीतिक सूत्रों का कहना था कि शुक्रवार रात तक विधानसभा अध्यक्ष पद किसे मिले, इसे लेकर तीनों दलों में आमराय नहीं बन पाई थी। इसके अलावा शिवसेना के खाते में सीएम पद समेत 16 विभाग जाने थे।
  • समें 11 कैबिनेट और पांच राज्य मंत्री जबकि एनसीपी के पाले में उपमुख्यमंत्री पद समेत 15 मंत्रालय, जिनमें 11 कैबिनेट और चार राज्य मंत्री हो सकते थे। इसी तरह कांग्रेस को 12 मंत्रालय दिए जाने थे, जिनमें नौ कैबिनेट और तीन राज्य मंत्री बनाए जाने थे। हालांकि कांग्रेस को उपमुख्यमंत्री पद की भी चाह थी।
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उद्धव ठाकरे (फाइल फोटो) - फोटो : Facebook
उद्धव ने भाजपा पर फोड़ा था ठीकरा
  • उद्धव ठाकरे ने अपने एक बयान में भाजपा पर प्रदेश में सरकार नहीं बन पाने का ठीकरा फोड़ा था। साथ ही भाजपा पर वादाखिलाफी का भी आरोप लगाया था। उद्धव ने कहा था कि कांग्रेस-एनसीपी के साथ सरकार बनाने की नौबत भाजपा की वजह से आई है। भाजपा ने बाला साहेब को वचन दिया था कि शिवसैनिक मुख्यमंत्री बनेगा। उसने अपना वादा तोड़ा है। दोबारा चुनाव न हो, इसलिए हमें यह फैसला लेना पड़ा।
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नितिन गडकरी - फोटो : अमर उजाला
गडकरी को था अंदेशा, बोले थे- नहीं सफल होगा प्रयोग
  • केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता नितिन गडकरी को महाराष्ट्र में तीन दलों की सरकार नहीं बन पाने का अंदेशा था। दरअसल उन्होंने अपने एक बयान में कहा था कि तीनों दल सत्ता की खातिर एक साथ आ रहे हैं। तीनों दलों का गठबंधन अवसरवादी है।
  • इनमें वैचारिक समानता नहीं है। विपरीत विचारधाराओं वाले ये दल भले ही मिलकर सरकार बना लें, लेकिन यह सरकार छह से आठ महीने से ज्यादा समय नहीं चलेगी। देश में पहले भी ऐसे कई प्रयोग बुरी तरह से नाकाम रहे हैं।
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तीनों दलों के गठबंधन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका
  • शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी की सरकार गठन की कोशिशों के खिलाफ शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। इसमें चुनाव परिणाम के बाद बनने वाले गठबंधन को नापाक बताकर राज्यपाल से निर्देश देने की अपील की गई कि वह इस गठबंधन को सरकार बनाने का न्योता न दें।
  • याचिका सुरेंद्र इंद्र बहादुर सिंह ने दायर की थी। याचिका में भारत सरकार सहित महाराष्ट्र की तमाम पार्टियों को प्रतिवादी बनाया गया था। साथ ही याचिका में कहा गया था कि एसआर बोम्मई मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश में ‘राजनीतिक पार्टी/पार्टियों के समूह’ के भाव स्पष्ट करने की जरूरत है।
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