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दो जांच एजेंसियों में नहीं हैं स्थायी बॉस: टारगेट किलिंग की जांच एनआईए के पास तो एनसीबी देख रही आर्यन खान का केस

सार

एनसीबी में सिपाही, ड्राइवर, इंटेलिजेंस अफसर, डीडीजी, डीडी/जेडडी से लेकर डीजी' तक के पद खाली पड़े हैं। 18 माह से ब्यूरो में स्थायी डीजी नहीं है। एनआईए के डीजी वाईसी मोदी 31 मई को रिटायर हुए थे। तभी से यह पद खाली पड़ा है। आईएस, कश्मीर में आतंकवाद, गुजरात के मुद्रा पोर्ट पर पकड़ी गई 3,000 किलोग्राम हेरोइन का मामला, केरल में गोल्ड स्मगलिंग और नक्सल से जुड़े कई दूसरे मामलों की जांच एनआईए कर रही है...
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एनसीबी और एनआईए - फोटो : Amar Ujala (सांकेतिक)
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विस्तार
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देश की दो बड़ी जांच एजेंसियां इन दिनों खासी चर्चा में हैं। इन दोनों एजेंसियों के पास हाई प्रोफाइल केस हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को कश्मीर में हुई 'टारगेट किलिंग' मामले की जांच सौंपी गई है। यह एजेंसी पहले भी आतंकवाद और नक्सल से जुड़े कई दूसरे केसों की जांच कर रही है। पिछले दिनों गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर पकड़ी गई 21 हजार करोड़ रुपये की 'हेरोइन' का केस भी एनआईए के हवाले किया गया है। दूसरी जांच एजेंसी नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) है। यह एजेंसी बॉलीवुड में शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान और दूसरे आरोपियों के खिलाफ दर्ज 'ड्रग्स' केस की जांच कर रही है। खास बात है कि इन दोनों ही जांच एजेंसियों के पास खुद के स्थायी बॉस नहीं हैं। एनआईए महानिदेशक का अतिरिक्त कार्यभार 'सीआरपीएफ' के डीजी कुलदीप सिंह को दिया गया है, जबकि 'एनसीबी' डीजी का अतिरिक्त चार्ज 'एनडीआरएफ' के डीजी एसएन प्रधान को सौंपा गया है।

एनसीबी में 18 तो एनआईए में पांच माह से नहीं है स्थायी डीजी

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो में पिछले 18 माह से डीजी का पद खाली पड़ा है। गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर पकड़ी गई 21 हजार करोड़ रुपये की 'हेरोइन' ने खलबली मचा रखी है। अफगानिस्तान से ईरान के बंदरगाह होते हुए गुजरात पहुंची 'नशे' की खेप को राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने पकड़ लिया था। यहां विपक्ष ने सवाल उठाया था कि ये काम तो एनसीबी का है। उसे गुजरात में 3,000 किलोग्राम हेरोइन पकड़नी चाहिए थी। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने तो ये भी कह दिया था कि मुंबई में सिनेमा जगत के सितारों के यहां छापे मारकर दस ग्राम-बीस ग्राम नशा बरामद कर सुर्खियां बटोरने वाली 'एनसीबी' को स्थायी डीजी क्यों नहीं मिल रहा। एनसीबी में सिपाही, ड्राइवर, इंटेलिजेंस अफसर, डीडीजी, डीडी/जेडडी से लेकर डीजी' तक के पद खाली पड़े हैं। 18 माह से ब्यूरो में स्थायी डीजी नहीं है। एनआईए के डीजी वाईसी मोदी 31 मई को रिटायर हुए थे। तभी से यह पद खाली पड़ा है। आईएस, कश्मीर में आतंकवाद, गुजरात के मुद्रा पोर्ट पर पकड़ी गई 3,000 किलोग्राम हेरोइन का मामला, केरल में गोल्ड स्मगलिंग और नक्सल से जुड़े कई दूसरे मामलों की जांच एनआईए कर रही है।

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पूर्णकालिक महानिदेशक न होना, सवाल खड़े करता है

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा, आखिर क्या कारण है कि पिछले 18 महीने में नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो का कोई पूर्णकालिक महानिदेशक नहीं बनाया गया। ये देश की एक अहम जांच एजेंसी है। मादक पदार्थों पर निगरानी, जांच और रोकथाम, ये सब एनसीबी की जिम्मेदारी है। डेढ़ साल से अधिक समय तक जांच एजेंसी के पास अपना कोई पूर्णकालिक महानिदेशक न होना, सवाल खड़े करता है। बतौर खेड़ा, क्या केंद्र सरकार ने नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो को अपनी खुदरा राजनीति का माध्यम बना दिया है। रणदीप सुरजेवाला ने कहा था, क्या यह राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ नहीं है। ड्रग्स के तार तालिबान और अफगानिस्तान से जुड़े हैं। क्या ड्रग माफिया को सरकार में बैठे किसी सफेदपोश और सरकारी एजेंसियों का संरक्षण प्राप्त है। कांग्रेस नेता प्रो. गौरव वल्लभ ने कहा, जम्मू-कश्मीर में दो सप्ताह के दौरान 32 नागरिकों को मार दिया गया है। सिलेक्टिव मर्डर हो रहे हैं। भारतीय सेना के दस जवानों ने अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति दे दी। केंद्रीय गृह मंत्री की तरफ से इतने गंभीर मसले पर कोई वक्तव्य तक नहीं आया है।

देश में पर्याप्त आईपीएस हैं, तुरंत नियुक्ति होनी चाहिए

पूर्व आईपीएस एवं सीआईसी रहे यशोवर्धन आजाद के अनुसार, सरकार को ऐसे अहम पदों पर तुरंत नियुक्ति करनी चाहिए। यही बात समझ में नहीं आती कि इतने महत्वपूर्ण पदों को खाली कैसे छोड़ा जा रहा है। एनआईए और एनसीबी को स्थायी बॉस मिलने चाहिएं। इन्हें खाली रखने का कोई औचित्य ही नहीं बनता। ये तो उस स्थिति में होता है, जब आईपीएस की कमी हो। देश में आज पर्याप्त संख्या में आईपीएस हैं। दर्जनों अफसर केंद्र में डीजी पद के लिए खड़े हैं, उन्हें जिम्मेदारी सौंपी जाए। कई बार खास अफसरों को एक्सटेंशन दे दी जाती है। यहां पर भी सवाल उठता है, ऐसा क्यों। क्या उस अधिकारी के जैसा कोई दूसरा अफसर देश में नहीं है। सरकार के पास इस तरह की अहम पोस्टिंग करने के लिए समय ही नहीं है, ये बात भी नहीं है। देश में कोई गंभीर खतरा नहीं है, लड़ाई नहीं चल रही है या कोई दूसरी ऐसी विकट परिस्थिति है कि सरकार को नियुक्ति का समय ही नहीं मिल पा रहा है। बतौर यशोवर्धन आजाद, केंद्र सरकार, ऐसे पदों के लिए 'पसंदीदा' आईपीएस ही क्यों चाहती है। मौजूदा डीजी स्तर के आईपीएस को मौका दिया जाए।
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