देश की दो बड़ी जांच एजेंसियां इन दिनों खासी चर्चा में हैं। इन दोनों एजेंसियों के पास हाई प्रोफाइल केस हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को कश्मीर में हुई 'टारगेट किलिंग' मामले की जांच सौंपी गई है। यह एजेंसी पहले भी आतंकवाद और नक्सल से जुड़े कई दूसरे केसों की जांच कर रही है। पिछले दिनों गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर पकड़ी गई 21 हजार करोड़ रुपये की 'हेरोइन' का केस भी एनआईए के हवाले किया गया है। दूसरी जांच एजेंसी नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) है। यह एजेंसी बॉलीवुड में शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान और दूसरे आरोपियों के खिलाफ दर्ज 'ड्रग्स' केस की जांच कर रही है। खास बात है कि इन दोनों ही जांच एजेंसियों के पास खुद के स्थायी बॉस नहीं हैं। एनआईए महानिदेशक का अतिरिक्त कार्यभार 'सीआरपीएफ' के डीजी कुलदीप सिंह को दिया गया है, जबकि 'एनसीबी' डीजी का अतिरिक्त चार्ज 'एनडीआरएफ' के डीजी एसएन प्रधान को सौंपा गया है।
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो में पिछले 18 माह से डीजी का पद खाली पड़ा है। गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर पकड़ी गई 21 हजार करोड़ रुपये की 'हेरोइन' ने खलबली मचा रखी है। अफगानिस्तान से ईरान के बंदरगाह होते हुए गुजरात पहुंची 'नशे' की खेप को राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने पकड़ लिया था। यहां विपक्ष ने सवाल उठाया था कि ये काम तो एनसीबी का है। उसे गुजरात में 3,000 किलोग्राम हेरोइन पकड़नी चाहिए थी। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने तो ये भी कह दिया था कि मुंबई में सिनेमा जगत के सितारों के यहां छापे मारकर दस ग्राम-बीस ग्राम नशा बरामद कर सुर्खियां बटोरने वाली 'एनसीबी' को स्थायी डीजी क्यों नहीं मिल रहा। एनसीबी में सिपाही, ड्राइवर, इंटेलिजेंस अफसर, डीडीजी, डीडी/जेडडी से लेकर डीजी' तक के पद खाली पड़े हैं। 18 माह से ब्यूरो में स्थायी डीजी नहीं है। एनआईए के डीजी वाईसी मोदी 31 मई को रिटायर हुए थे। तभी से यह पद खाली पड़ा है। आईएस, कश्मीर में आतंकवाद, गुजरात के मुद्रा पोर्ट पर पकड़ी गई 3,000 किलोग्राम हेरोइन का मामला, केरल में गोल्ड स्मगलिंग और नक्सल से जुड़े कई दूसरे मामलों की जांच एनआईए कर रही है।