सरकार के साथ टकराव बढ़ाते हुए सोशल मीडिया कंपनी ट्विटर ने भारतीय कानूनों को मानने के लिए केंद्र की सख्ती के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
केंद्र सरकार ने एक साल में ट्विटर को खालिस्तान समर्थक, किसान आंदोलन और कोविड-19 के दौरान सरकार की आलोचना या गलत जानकारी फैलाने वाले ट्विटर खातों पर कार्रवाई के लिए लिखा था।
नहीं माने आदेश
भारत सरकार ने सार्वजनिक रूप से बयान दिया था कि ट्विटर समेत सोशल मीडिया कंपनियां कानूनी बाध्यता के बावजूद सामग्री हटाने के अनुरोध का पालन नहीं कर रही हैं।
चार जुलाई तक का दिया था वक्त
जून के अंत में आईटी मंत्रालय ने चेतावनी दी थी कि 4 जुलाई तक आदेशों का पालन नहीं हुआ, तो ट्विटर का इंटरमीडियरी दर्जा खत्म कर दिया जाएगा। तब ट्विटर ने आदेशों का पालन किया। इससे हर ट्वीट के लिए कंपनी जिम्मेदार ठहराई जा सकेगी।
पक्षपात के आरोप
भारत में ट्विटर पर पक्षपात के आरोप लगते रहे हैं। आरोप है कि कई राजनेताओं समेत प्रभावशाली व्यक्तियों के खातों को नीतियों के उल्लंघन के नाम पर ब्लॉक कर दिया है।