दक्षिणपंथी रुझान वाले कई बड़े फेसबुक ग्रुप्स में इस तस्वीर को जम्मू-कश्मीर में अमरनाथ यात्रा रोके जाने के बाद कथित तौर पर शुरू हुई आक्रामक सैन्य कार्रवाई का प्रतीक बताया गया है। जबकि कई अन्य ग्रुप्स में इस तस्वीर को कश्मीर के ही अलग-अलग इलाकों का बताकर शेयर किया जा रहा है।
कुल मिलाकर यह तस्वीर सिर्फ फेसबुक पर 70 हजार से ज्यादा बार शेयर की जा चुकी है। इसके अलावा वॉट्सऐप और ट्विटर पर भी इस तस्वीर को शेयर किया जा रहा है। लेकिन इस वायरल फोटो के पीछे पूरी कहानी क्या है? यह जानने के लिए बीबीसी ने इस तस्वीर को खींचने वाले 19 वर्षीय फोटोग्राफर फैसल बशीर से बात की।
यह तस्वीर उस समय की है जब दक्षिण-कश्मीर के शोपियां जिले में भारतीय फौज और चरमपंथियों के बीच मुठभेड़ चल रही थी। फैसल अनंतनाग जिले के सरकारी डिग्री कॉलेज में मास कॉम के स्टूडेंट हैं और 50 घंटे से भी ज्यादा वक्त तक चले इस एनकाउंटर की तस्वीरें खींचने के लिए शोपियां पहुंचे थे।
उन्होंने बताया, "करीब डेढ बजे का समय था जब मैंने तस्वीरें खींचना शुरू किया। उस समय एनकाउंटर भीतर चल रहा था। शॉटगन की आवाजें आ रही थीं। जितने भी रास्ते और गलियां एनकाउंटर की जगह की ओर जा रहे थे, सभी पर नाकेबंदी की गई थी।"
फैसल बशीर ने बताया कि वो बीते दो सालों से कश्मीर घाटी में फोटोग्राफी कर रहे हैं। कुछ दिन पहले तक वो कश्मीर से निकलने वाले एक अखबार के लिए काम करते थे। फिलहाल श्रीनगर से चलने वाली एक न्यूज वेबसाइट के लिए काम कर रहे हैं।
उन्होंने बताया, "जिस भारतीय सैनिक की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, वो एनकाउंटर साइट से काफी दूर लगाई गई नाकेबंदी का हिस्सा था। ये वो जगह थी जहाँ कुछ स्थानीय लोग भारतीय सरकार द्वारा कश्मीर को लेकर किये गए फैसलों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे।"
फैसल ने कहा, "जिस समय मैंने यह तस्वीर खींची, स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) का एक सैनिक सड़क के बीचोबीच कुर्सी डालकर बैठा हुआ था। उसके हाथ में एक ऑटोमेटिक बंदूक थी जिसे वो बीच-बीच में प्रदर्शनकारियों को दिखा रहा था। उसकी ड्यूटी थी कि प्रदर्शनकारी एनकाउंटर साइट के करीब न पहुंच सकें।"
फैसल बशीर ने स्थानीय पुलिस से मिली सूचना का हवाला देकर कहा, "1-2 अगस्त की दरमियानी रात को शुरू हुए इस एनकाउंटर में दो चरमपंथियों और एक भारतीय सैनिक समेत चार लोगों की मौत हुई। इस एनकाउंटर में मारे गये आम नागरिक की पहचान बिहार के रहने वाले मुजीब के तौर पर हुई है जो शोपियां में मजदूरी के लिए गया था।"