सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर चल रहे विवाद पर महिला कार्यकर्ता तृप्ति देसाई ने एलान किया है कि वह 17 नवंबर को मंदिर में प्रवेश के लिए जाएंगी। इसके लिए उन्होंने केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को चिट्ठी लिखकर सुरक्षा की मांग भी की है। तृप्ति ने एलान किया है कि वह 17 नवंबर से शुरू हो रहे वार्षिक मंडल मकरविल्लक्कु में मंदिर में प्रवेश करेंगी।
तृप्ति देसाई ने कहा कि उन्हें मंदिर में प्रवेश को लेकर धमकियां मिल रही हैं। इसके चलते उन्होंने सीएम पिनराई विजयन से सुरक्षा की मांग की है। वहीं मुख्यमंत्री विजयन ने गुरुवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। बता दें कि तृप्ति देसाई भूमाता ब्रिगेड की संस्थापक भी हैं। इस ब्रिगेड के माध्यम से ही वह महिलाओं के हक की लड़ाई लड़ रही हैं।
बता दें कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने केरल के सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने वाले अपने आदेश पर फिलहाल रोक लगाने से इंकार कर दिया है। हालांकि शीर्ष अदालत अपने 28 सितंबर को दिए आदेश पर पुनर्विचार करने के लिए तैयार हो गई है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने मंगलवार को कहा कि पुनर्विचार के लिए दाखिल 49 याचिकाओं पर 22 जनवरी को खुली अदालत में सुनवाई होगी।
चीफ जस्टिस के अलावा जस्टिस रोहिंग्टन फली नरीमन, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदु मल्होत्रा की मौजूदगी वाली पांच सदस्यीय पीठ ने इन याचिकाओं पर चेंबर में सुनवाई की। इसके बाद पीठ ने आदेश दिया कि शीर्ष अदालत की उपयुक्त पीठ इन याचिकाओं और सबरीमाला से जुड़े अन्य लंबित मामलों पर 22 जनवरी को ओपन कोर्ट में सुनवाई करेगी। इससे पहले 9 अक्तूबर को पुनर्विचार याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग को शीर्ष अदालत ने खारिज कर दिया था।
बता दें कि 28 सितंबर को तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने भगवान अयप्पा के सबरीमाला मंदिर के कपाट सभी आयु वर्ग की महिलाओं के लिए खोलने का आदेश दिया था। संविधान पीठ ने मंदिर में 10 से 50 साल तक की महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी की सदियों पुरानी प्रथा को असंवैधानिक व भेदभावपूर्ण बताया था। हालांकि इस निर्णय के बावजूद भगवान अयप्पा के भक्तों ने हिंसक आंदोलन चलाकर मंदिर के कपाट खुलने पर भी महिलाओं को प्रवेश नहीं करने दिया था।
ये भी कहा पीठ ने-
- 28 सितंबर को दिए गए आदेश पर फिलहाल किसी भी तरह की रोक नहीं लगेगी
- पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई का मतलब पिछले फैसले को खारिज करना नहीं
- पुरानी याचिकाओं पर ही सुनवाई होगी किसी नई याचिका को अभी प्रक्रिया में जगह नहीं मिलेगी