निसंदेह कोई भी नागरिक सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर टिप्पणी या आलोचना कर सकता है, लेकिन उसे अदालत के जज की क्षमता, योग्यता, ज्ञान, ईमानदारी, निष्ठा और निप्पक्षता की कुछ जानकारी होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस आरएफ नरीमन और जस्टिस विनीत सरन पर लगाए गए आरोपों को अपमानजनक व शर्मनाक करार देते हुए इंडियन बार एसोसिएशन (आईबीए) के अध्यक्ष निलेश ओझा, इसी एसोसिएशन के महाराष्ट्र व गोवा राज्य अध्यक्ष विजय कुर्ले और मानवाधिकार सुरक्षा परिषद के राष्ट्रीय सचिव राशिद खान पठान को अवमानना का दोषी करार देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी निर्णय में लिखी।