त्रिपुरा के शाही परिवार के सदस्य और टिपरा मोथा के अध्यक्ष प्रद्योत देबबर्मा मूल निवासियों के लिए अलग राज्य ग्रेटर टिपरालैंड की मांग कर रहे हैं। हाल के विधानसभा चुनाव में टिपरा मोथा पार्टी ने राज्य की 60 में से 13 सीटों पर जीत दर्ज की है।
टिपरा मोथा के अध्यक्ष प्रद्योत किशोर देबबर्मा का कहना है कि राज्य के मूल निवासियों के मुद्दे पर सभी राजनैतिक पार्टियों को साथ बैठना होगा और उनकी समस्याओं का संवैधानिक समाधान खोजना होगा। देबबर्मा ने त्रिपुरा ट्राइबल एरियाज ऑटोनोमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल (TTAADC) को सीधे फंडिंग देने की मांग भी की। साथ ही इसे अपनी पुलिस फोर्स और जमीन संबंधी अधिकार भी देने की मांग की।
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टिपरा मोथा अध्यक्ष प्रद्योत देबबर्मा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट की, जिसमें उन्होंने कहा कि अगर केंद्र सरकार, टिपरा मोथा, भाजपा, सीपीआई (एम), कांग्रेस और आईपीएफटी टीटीएएडीसी को सीधे फंडिंग देने के लिए तैयार हैं तो इसे शुरू कर देना चाहिए। अगर सभी पार्टियां इन्हें पुलिस फोर्स और जमीन संबंधी अधिकार भी देने के लिए तैयार हैं तो इन्हें लागू किया जाना चाहिए। इसका समाधान तभी निकल सकता है जब सभी पार्टियां एक साथ बैठें और त्रिपुरा के मूल निवासियों की मांगों पर विचार करें।
बता दें कि त्रिपुरा के शाही परिवार के सदस्य और टिपरा मोथा के अध्यक्ष प्रद्योत देबबर्मा मूल निवासियों के लिए अलग राज्य ग्रेटर टिपरालैंड की मांग कर रहे हैं। हाल के विधानसभा चुनाव में टिपरा मोथा पार्टी ने राज्य की 60 में से 13 सीटों पर जीत दर्ज की है। देबबर्मा ने कहा कि ग्रेटर टिपरालैंड की मांग को लेकर कोई भी उन्हें जेल नहीं भेज सकता क्योंकि संविधान में हर किसी को ऐसी मांग करने का अधिकार मिला हुआ है।
देबबर्मा ने दावा किया केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने टिपरा मोथा की मांगों को पूरा करने के लिए वार्ताकार नियुक्त करने की बात कही थी। देबबर्मा ने कहा कि हम आईपीएफटी पार्टी की उस गलती को नहीं दोहरा सकते, जिसमें आईपीएफटी भाजपा सरकार में शामिल हो गई थी। 30 फीसदी जनता को नजरअंदाज करके सबका साथ, सबका विश्वास के विजन को पूरा नहीं किया जा सकता। बता दें कि भाजपा साफ कर चुकी है कि वह त्रिपुरा के टुकड़े नहीं करेगी। हालांकि भाजपा नेताओं ने टीटीएएडीसी को और विधायी, आर्थिक और कार्यकारी अधिकारी देने के पक्ष में है।
उल्लेखनीय है कि साल 1985 में संविधान की छठी अनुसूची के तहत त्रिपुरा में स्वायत्त जिला परिषद का गठन किया गया। आदिवासी समुदाय के अधिकारों और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने के लिए इस संगठन का गठन किया गया था। अब टिपरा मोथा पार्टी की मांग है कि इन टीटीएएडीसी को ही मिलाकर एक अलग राज्य बनाया जाए। टीटीएएडीसी के पास विधायी और कार्यकारी शक्तियां हैं और यह राज्य के कुल क्षेत्र के दो तिहाई हिस्से को कवर करता है। इस परिषद में 30 सदस्य होते हैं, जिनमें 28 निर्वाचित होते हैं।