फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Trans Shakti: 'भिखारी, छेड़छाड़ और ...,' लोकसभा टिकट का बड़ा हिस्सा मांगते हुए ट्रांसजेंडरों का छलका दर्द

Fri, 23 Feb 2024 03:34 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आम चुनावों में और अधिक राजनीतिक दलों द्वारा ट्रांसजेंडर लोगों को टिकट दिए जाने की उम्मीद करते हुए समुदाय के लोगों ने कहा कि नारी शक्ति को आगे बढ़ाया जाना चाहिए ताकि 'ट्रांस शक्ति' को भी उचित मान्यता और प्रतिनिधित्व मिल सके।
 
विज्ञापन
ट्रांसजेंडरों का छलका दर्द (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्य आगामी लोकसभा चुनावों के लिए टिकटों में बड़ी हिस्सेदारी और 'ट्रांस शक्ति' की मान्यता की मांग कर रहे हैं ताकि उनकी आवाज सुनी जा सके। ट्रांसजेंडरों का कहना है कि उन्हें दिन में अनदेखा कर दिया जाता है और रात में उनका शोषण किया जाता है। इसलिए अपने समुदायों के हक के लिए वह ही खड़े और लड़ सकते हैं।

विज्ञापन


आम चुनावों में और अधिक राजनीतिक दलों द्वारा ट्रांसजेंडर लोगों को टिकट दिए जाने की उम्मीद करते हुए समुदाय के लोगों ने कहा कि नारी शक्ति (महिला सशक्तिकरण) को आगे बढ़ाया जाना चाहिए ताकि 'ट्रांस शक्ति' को भी उचित मान्यता और प्रतिनिधित्व मिल सके।

मैं विधानसभा या लोकसभा चुनाव लड़ने को तैयार: मीरा परीदा
मायाधर परीदा के रूप में जन्मी बीजू महिला जनता दल की उपाध्यक्ष मीरा परीदा ने अफसोस जताया कि आजादी के 75 साल बाद भी ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्यों को दिन में अनदेखा कर दिया जाता है और रात में उनका शोषण किया जाता है। उन्होंने आगे कहा, 'अगर पार्टी मुझे जिम्मेदारी सौंपने का फैसला करती है तो मैं विधानसभा या लोकसभा चुनाव लड़ने को तैयार हूं।'
विज्ञापन


बता दें, परीदा ने 12 साल की उम्र में ही अपना घर छोड़ दिया था। उन्होंने अपने बचपन को याद करते हुए बताया कि किस तरह वह अपने साथियों से अलग थीं। हालांकि, उन्होंने शांत रहना नहीं चुना और उन्होंने अपनी सच्चाई को मान लिया। वह चुनौतियों को टक्कर देने के लिए दृढ़ थीं। इसलिए, उन्होंने खुद को सामाजिक कार्यों में डुबो दिया और बाद में राजनीति में आ गईं।

ट्रांसजेंडर कुछ भी कर सकते हैं: बॉबी किन्नर 
वहीं, आम आदमी पार्टी नेता और दिल्ली नगर निगम की पहली ट्रांसजेंडर पार्षद बॉबी किन्नर ने देश की राजनीति में ट्रांसजेंडर लोगों के प्रतिनिधित्व और उन्हें शामिल करने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कुछ साल पहले, लोग सोचते थे कि ट्रांसजेंडर व्यक्ति कुछ नहीं कर सकते। हालांकि, यह सच नहीं है। पुरुष और महिलाएं जो कुछ भी कर सकते हैं, हम भी कर सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि देश के राजनेता अपने संघर्षों को सम्मान के बैज के रूप में पहनना पसंद करते हैं, लेकिन ये कई ट्रांसजेंडर व्यक्तियों द्वारा सामना किए गए कष्टप्रद अनुभवों की तुलना में काफी कम हैं।

मैं एक भिखारी... : मुव्वाला
चंद्रमुखी मुव्वाला, जिन्होंने 2018 के तेलंगाना विधानसभा चुनावों में एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था, ने कहा कि देश की राजनीति में समुदाय के समावेश को बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता है। उन्होंने कहा, 'ट्रांस समुदाय को उन समस्याओं के बारे में अधिक बात करने की आवश्यकता है जिनका हम सामना करते हैं। हम जानते हैं कि हमारे दुख क्या हैं। मैं सड़क पर एक भिखारी हूं, एक यौनकर्मी हूं, मुझे मेरे परिवार ने बाहर निकाल दिया है, मुझसे जबरन वसूली की जा रही है, मेरे साथ छेड़छाड़ की जा रही है और मेरे सहपाठियों द्वारा दुष्कर्म किया गया। हमारे साथ बहुत सी चीजें होती हैं। जो लोग संसद में हमारा प्रतिनिधित्व करने का दावा करते हैं वे उस दर्द को नहीं जानते जो हम जानते हैं।'

गोशामहल विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने वाली मुव्वाला ने कहा कि अगर हम जैसे लोगों के लिए आरक्षण होगा तो यह बेहतर होगा क्योंकि आर्थिक रूप से हम फिट नहीं हैं और हमारे पास कोई समर्थन नहीं है। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति ऐसी है कि ज्यादातर बड़ी पार्टियां ट्रांसजेंडर उम्मीदवार चुनने के बारे में सोचती भी नहीं हैं और केवल छोटी पार्टियां ही उन पर विचार करती हैं।

हमें दुनिया से सीखना चाहिए: अक्कई पद्मशाली
कर्नाटक में ट्रांसजेंडर कार्यकर्ता और कांग्रेस सदस्य अक्कई पद्मशाली ने व्यवस्था में बदलाव की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने संसद और राज्य विधान परिषदों में प्रतिनिधित्व बढ़ाने की वकालत करते हुए सुझाव दिया कि हमें दुनिया से सीखना चाहिए कि यौन अल्पसंख्यकों का उत्थान कैसे किया जाए। उन्होंने कहा कि हमारा मतदान अनुपात बहुत कम है और ट्रांस आबादी के लिए अब राजनीतिक ढांचे की जरूरत है। 

48,044 तृतीय-लिंग मतदाता
गौरतलब है, साल 2024 में भारत के चुनाव आयोग के साथ 48,044 तृतीय-लिंग मतदाता पंजीकृत थे। साल 2019 में यह संख्या 39,683 से बढ़ गई है। 2019 में 17वें आम चुनाव में मतदाताओं की कुल संख्या 91.2 करोड़ थी। उनमें से 47.34 करोड़ पुरुष थे, 43.85 करोड़ महिलाएं थीं और 39,075 तीसरे लिंग के थे। कुल प्रतियोगी 8,054 थे, जिनमें से 7,322 पुरुष थे और 726 महिलाएं थीं जबकि छह तीसरे लिंग के थे।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें