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12 कश्मीरी पंडितों की आपबीती : कत्ल, विस्थापन, हिंदुओं से भेदभाव.. यह नरसंहार नहीं तो और क्या था?

Tue, 29 Mar 2022 05:15 AM IST
योगेश साहू अमर उजाला रिसर्च टीम, नई दिल्ली।

सार

एक पीड़ित ने कुछ इस तरह अपना दर्द बयां किया। उन्होंने कहा कि न्यूज चैनलों पर आतंकी यासीन मलिक मेरे दादाजी की हत्या करने की बात गर्व से स्वीकारता है, मलिक को देश के राजनेताओं ने एक हस्ती की तरह सम्मान दिया। कुछ लोग कहते हैं कि कश्मीर में नरसंहार नहीं हुआ, यह बात आप मुझे नहीं समझा सकते।
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प्रदर्शन करते कश्मीरी पंडित (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
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विस्तार
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अमेरिका स्थित संस्था अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार व धार्मिक स्वतंत्रता आयोग ने माना है कि 1989 और इसके बाद के कई वर्षों तक कश्मीर में पंडितों का नरसंहार हुआ। आयोग ने सोमवार को ऑनलाइन सुनवाई की। इसमें 12 कश्मीरी हिंदुओं ने अपने परिजनों, रिश्तेदारों, मित्रों और परिचितों पर हुए अत्याचारों व हत्याओं का ब्योरा दिया। आयोग के पदाधिकारियों ए आदित्यांजी और कार्ल क्लींस ने इन्हें दर्ज किया। आयोग ने कहा, कत्ल, विस्थापन, हिंदुओं से भेदभाव...यह नरसंहार नहीं तो और क्या था?

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पिता का अपहरण कर मार डाला : अंजलि रैना
हम छतरबल में रहते थे। मेरे पिता चमन लाल की 24 जून 1990 को अपहरण के बाद इस्लामी आतंकियों ने मजहब के नाम पर यातनाएं दी और फिर हत्या कर दी। शरीर के टुकड़े करके श्रीनगर की मुख्य सड़क पर डाल दिए। उन्हें केवल इसलिए मारा गया क्योंकि वे मुसलमान नहीं थे।

तीन दिन पेड़ पर लटकाए रखा पिता का शव : रविंदर पंडिता
मेरे पिता हंदवारा के बागपुरा गांव के रहने वाले जगन्नाथ पंडिता की आतंकियों ने कई घंटे यातनाएं देने के बाद हत्या कर दी थी। हमें उनकी हत्या की खबर भी रेडियो पर सुनते समय मिलीं। हम न उनके अंतिम संस्कार में जा सके, न कभी शव को देख पाए। उनका शव तीन दिन पेड़ पर लटका रहा, कोई उतारने करीब नहीं जा सकता था, क्योंकि फिर उसे भी आतंकी मार डालते।

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दादाजी की हत्या करने वाले सम्मान पाते रहे : स्वप्नावली रैना
4 नवंबर 1989 को मेरे दादाजी कश्मीर में जिला व सत्र जज नीलकंठ गंजू की हाईकोर्ट परिसर में हत्या की गई। आज तक उनकी हत्या करने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। न्यूज चैनलों पर आतंकी यासीन मलिक मेरे दादाजी की हत्या करने की बात गर्व से स्वीकारता है, मलिक को देश के राजनेताओं ने एक हस्ती की तरह सम्मान दिया। कुछ लोग कहते हैं कि कश्मीर में नरसंहार नहीं हुआ, यह बात आप मुझे नहीं समझा सकते।

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आतंकी पिता को घर से ले गए और गोली मार दी
  • कन्हैयालाल भट्ट मेरे पिता के कजिन के पति थे। जिले के सबसे अच्छे वकील, बडगाम में कश्मीरी मुसलमानों के केस लड़ते थे। 8 जून 1990 की रात हिजबुल मुजाहिदीन के कायर आतंकी घर आए और बाहर ले जाकर यातनाएं दी, मन भर गया तो गोली मार दी। शव एक खेत में लटका दिया।
  • अश्विनी घड़ियाली मेधावी छात्र व मेरे स्कूली मित्र थे। छतरबल में उनके घर पर 5 आतंकी आए और गोलियां मार दी। पिता उन्हें घायल अवस्था में पुलिस के पास ले गए तो उन्हें दुत्कार कर भगा दिया गया, अस्पताल ले जाते समय अश्विनी की मौत हो गई।
  • छतरबल में अशोक कुमार दुकानदार थे। उन्हें विश्वास था कि आतंकी आए तो पड़ोसी कश्मीरी मुस्लिम मदद करेंगे। जब आतंकियों ने घर आकर उन्हें गोली मारी, तो कोई नहीं आया। उनकी पत्नी ने आतंकियों से कहा, हमें भी मार दो। आतंकियों ने जवाब दिया, हम चाहते हैं कि आप व आपके बच्चे अशोक के लिए विलाप करते हुए जीते रहें।
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