देश में आलू की कीमतों में बढ़ोत्तरी के बीच टमाटर को लेकर अच्छी खबर सामने आई है। टमाटर के रेट में तेजी से गिरावट देखने को मिल रही है। हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब में नई फसल की आवक के कारण एशिया की सबसे बड़ी फल-सब्जी मंडी आजादपुर मंडी दिल्ली में टमाटर की कीमतों में 40 फीसदी की गिरावट देखी गई है। दिल्ली में टमाटर की कीमत 800 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गई है। जबकि दिल्ली के खुदरा बाजार में टमाटर की कीमत 8-10 रुपये प्रति किलो हो गई है। टमाटर के दाम घटने से आम लोगों को राहत है, लेकिन किसान परेशान हैं। क्योंकि उनको सही दाम मिल नहीं पा रहे हैं।
आजादपुर मंडी एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक कौशिक का कहना है कि भीषण गर्मी और हीट वेव के चलते टमाटर की फसल बर्बाद हुई। लेकिन किसानों ने फिर से फसल उगाई, जिससे उनका उत्पादन अच्छा हुआ। इनमें राजस्थान जैसे राज्य में टमाटर की आवक सुधरी। जबकि यूपी, हरियाणा और पंजाब में कीमतों में गिरावट 40 फीसदी तक देखी गई। टमाटर की क्वालिटी के आधार पर थोक स्तर पर 5 से 15 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। इधर, दिल्ली-एनसीआर के आसपास के राज्यों से टमाटर की नई फसल होने से टमाटर की आवक में तेजी देखी जा रही है। बाजार में थोक टमाटर के दाम 700-800 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गए हैं।
इधर, टमाटर के दाम किसानों के लिए परेशानी बने हुए हैं। किसानों ने बड़ी आशा के साथ टमाटर की खेती की थी, लेकिन अब भाव की गिरावट की वजह से सभी किसानों को परेशानियां आ रही हैं। कम पैसों में टमाटर को बेचना अब उनकी मजबूरी बन गया है, अगर वह इंकार कर देंगे, तो उनका सारा माल सड़ जाएगा। एकाएक दाम गिरने से किसान नाराज हैं। किसानों का कहना है कि टमाटर और बाकी सब्जियों में गिरावट आने की वजह से किसान उनकी लागत तक नहीं निकल पा रही है। जिन किसानों ने तेज धूप में मेहनत कर अपनी फसल देख अच्छे मुनाफे की उम्मीद की थी, अब उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया है।
मंडी में टमाटर ही नहीं इसके अलावा बाकी सब्जियों के भी यही हाल है। सब्जी मंडियों में हरी मिर्च 8 से 10 रुपये किलो में बिक रही है, तो वही ग्वार फली का रेट भी 10 से 12 रुपये किलो हो गया है। आलू की बात करें तो, बीते दिनों में आलू की कीमत में 12 फीसदी उछाल देखा गया है। मंडी में सब्जी बेचने आने वाले किसानों का कहना है कि इस तरीके से सब्जियों का दाम गिरता रहा, तो किसानों को भारी नुकसान होगा। कई किसानों को लागत निकालना भी मुश्किल भरा हो रहा है।