उन्होंने दावा किया कि भाजपा के दबाव में संघ के सरकार्यवाह सुरेश भैयाजी जोशी ने न सिर्फ यह प्रस्ताव धर्म संसद में आने नहीं दिया बल्कि उन्हें ही विहिप से निष्कासित करवा दिया। अब अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद (अहिप) के अध्यक्ष तोगड़िया ने आरोप लगाया कि सत्ता में आने के बाद भाजपा ने राम का नाम त्याग दिया और अब चुनाव की आहट सुनते ही उसे फिर राम याद आने लगे।
उनका कहना है कि भाजपा राम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण को लेकर अभी भी गंभीर नहीं है और वह इस मुद्दे को उठाकर महंगाई, पेट्रोल की बढ़ती कीमत, बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं, राफेल सौदे जैसे ज्वलंत मुद्दों को गौड़ कर देना चाहती है।
अहिप द्वारा तैयार अध्यादेश में कहा गया है कि राम जन्मभूमि स्थल को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित किया जाता है। प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल तथा अवशेष अधिनियम 1958 के सभी प्रावधान इस मामले में लागू होंगे। ‘अयोध्या में कुछ क्षेत्र के अधिग्रहण अधिनियम 1993’ के तहत केंद्र सरकार द्वारा अधिग्रहीत भूमि पर ही राम जन्मभूमि मंदिर का निर्माण किया जाएगा।
21 अक्तूबर से यात्रा
राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए अहिप लखनऊ से अयोध्या के लिए एक जनजागरण यात्रा निकाल रही है। इस दौरान वह लोगों से मंदिर निर्माण के समर्थनमें हस्ताक्षर अभियान भी चलाएगी। तोगड़िया का कहना है कि संतों को अध्यादेश लेने की मांग नहीं करनी चाहिए बल्कि भाजपा-विहिप को इसका आदेश देना चाहिए।