परमाणु घड़ी लगाने का निर्णय उपभोक्ता, दूरसंचार, इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी, वित्त, गृह मंत्रालय और अंतरिक्ष विभाग की सहमति के बाद लिया गया है। छह दिशाओं में इसे लगाया जाना है जिसके लिए छह स्थानों की चयन प्रक्रिया सरकार ने शुरू कर दी है। आईटी मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक मौजूदा समय 90 सेकेंड तक समय का अंतर कई बार लेनदेन के दौरान देखा गया है। ऐसे में डेटा या धन के स्थानांतरण में सेंध का खतरा बढ़ जाता है।
परमाणु घड़ी लगने पर डाटा या धन के स्थानांतरण में सेंध लगाना संभव नहीं होगा। साथ ही दुनिया भर से होने वाले साइबर हमलों के सटीक समय की जानकारी भी हासिल होगी। उन्होंने कहा कि शेयर बाजार में एक सेकेंड का अंतर भी कई बार भारी पड़ता है। ऐसे में विभिन्न स्तरों पर यह घड़ी महत्वपूर्ण और लाभकारी होगी। परमाणु घड़ी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम की माइक्रोवेव, ऑप्टिकल या अल्ट्रावायलेट क्षेत्र में इलेक्ट्रान स्थानांतरण आवृत्ति का प्रयोग समय की निगरानी मानक एलिमेंट के रूप में करती है।
परमाणु घड़ियां ज्ञात सबसे सटीक समय और आवृत्ति की मानक हैं। गौरतलब है कि इन्हें खासतौर पर अंतरराष्ट्रीय समय वितरण सेवाओं के लिए प्राथमिक मानकों के रूप में उपयोग किया जाता है। साथ ही वैश्विक नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम जैसे जीपीएस में भी इसका प्रयोग किया जाता है।