इसी तरह पूर्व भाजपा अध्यक्ष डॉ. मुरली मनोहर जोशी की अध्यक्षता वाली प्राक्कलन समिति की बैठकें तो लगातार होती रही हैं लेकिन एक नवंबर को हुई बैठक में उठे विवाद के बाद इसकी गतिविधियां ठप हैं। चूंकि यह वित्त समिति है इसलिए इसकी रिपोर्ट संसद में तभी पेश है सकती है जब उसके सभी 30 सदस्यों ने उसे एक राय से पारित किया हो। लेकिन आखिरी बैठक में भाजपा के कई सांसदों ने ही अंतिम रिपोर्ट के कुछ हिस्सों पर आपत्ति जता दी थी।
सूत्रों के अनुसार इस रिपोर्ट में नौकरियों और जीडीपी जैसे संवेदनशील विषयों पर सरकार के रवैये की आलोचना की गई थी। इसीलिए भाजपा सांसद राजीव प्रताप रूडी, रमेश बिधुड़ी और निशिकांत दुबे ने सरकार का पक्ष ठीक से न रखे जाने को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज करा दी थी। उनका कहना था सरकारी आंकड़े इस समिति के निष्कर्ष का समर्थन नहीं करते हैं।
संसदीय मामलों के जानकारों के अनुसार, ऐसे में समिति के अध्यक्ष को बैठक बुलाकर एक राय जुटाने के प्रयास करने चाहिए थे। लेकिन डॉ. जोशी ने पिछले तीन महीनों के दौरान समिति की बैठक ही नहीं बुलाई। इसलिए लोकसभा भंग होने के साथ ही प्राक्कलन समिति की ड्राफ्ट रिपोर्ट भी रद्दी की टोकरी के हवाले कर दी जाएगी।
बुधवार को लोकसभा में प्रश्नकाल के बाद सभी संसदीय दल के नेताओं के विदाई भाषण के बाद संसद स्थगित हो जाएगी। लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने सांसदों के सम्मान मे एक दोपहर भोज का आयोजन किया है।