पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में शानदार जीत के 10 महीने के बाद सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने बुधवार को नगर निकायों में भी पूरे विपक्ष का सूपड़ा साफ कर दिया। तृणमूल कांग्रेस ने राज्य की 108 नगरपालिकाओं में से102 में जीत दर्ज की है।
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राज्य निर्वाचन आयोग (एसईसी) के एक अधिकारी के अनुसार तृणमूल कांग्रेस ने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और नंदीग्राम से विधायक शुभेंदु अधिकारी का गढ़ मानी जाने वाली कांथी नगरपालिका में जीत हासिल की है। वहीं, उत्तर बंगाल की पहाड़ों की राजनीति में नवगठित ‘हमरो पार्टी ने तृणमूल कांग्रेस, गोरखा जनमुक्ति मोर्चा और भाजपा को पछाड़ कर दार्जिलिंग नगरपालिका पर कब्जा कर लिया है।
विधानसभा चुनाव में 77 सीट हासिल कर मुख्य विपक्ष बनी भाजपा एक भी नगरपालिका को अपने नाम नहीं कर सकी। यही हाल कांग्रेस पार्टी का भी रहा। हालांकि दोनों दलों ने कुछ वार्ड जरूर जीते हैं। तृणमूल कांग्रेस ने 27 नगरपालिकाओं में सभी वार्डों पर जीत दर्ज कर वहां विपक्ष को शून्य पर पहुंचा दिया है।
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राज्य चुनाव आयोग के अधिकारी ने बताया, चार नगरपालिकाओं में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिली है। इनमें मुर्शिदाबाद की बेलडांगा, पुरुलिया जिले की झालदा, हुगली जिले की चाम्पदानी और पूर्वी मेदिनीपुर की इगरा नगरपालिका शामिल हैं और यहां से जीते निर्दलीयों की भूमिका अहम हो गई है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री व तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी ने इस अभूतपूर्व जीत के लिए जनता का आभार जताया और विजयी उम्मीदवारों और समर्थकों को विनम्रता के साथ काम करने की सलाह दी।
कांथी नगरपालिका चार दशकों से अधिकारी परिवार का रहा है गढ़
चार दशकों से अधिकारी परिवार का गढ़ रहे कांथी नगरपालिका में तृणमूल ने जीत दर्ज कर शुभेंदु अधिकारी और उनके परिवार को बड़ा झटका दिया है। नेता प्रतिपक्ष अधिकारी के पिता शिशिर अधिकारी वर्ष 1971 से 2009 के बीच (केवल एक बार वर्ष 1981-86 को छोड़कर) कांथी नगरपालिका के अध्यक्ष रहे हैं। सांसद बनने के बाद उन्होंने यह जिम्मेदारी अपने बेटे दिब्येंदु अधिकारी को सौंपी। दिब्येंदु अधिकारी जब वर्ष 2016 का लोकसभा उपचुनाव जीतकर सांसद बने तो उन्होंने यह जिम्मा अपने छोटे भाई सौमेंदु को सौंपा था।