पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के एक विधायक का एक कथित वीडियो सामने आया है, जिसके बाद नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। इस कथित वीडियो में वह पार्टी कार्यकर्ताओं से यह सुनिश्चित करने के लिए कहते हुए दिखाई दिए कि अगले साल होने वाले पंचायत चुनावों में विपक्ष उम्मीदवार तक न खड़े कर पाए। अगर विपक्षी दल अपने प्रत्याशी खड़े भी कर देते हैं तो उन्हें एक भी वोट नहीं मिलना चाहिए।
हावड़ा जिले के दोमजुर विधानसभा क्षेत्र से टीएमसी विधायक कल्याण घोष ने स्वीकार किया है कि यह बयान उन्होंने दिया था। हालांकि, उन्होंने कहा कि वीडियो में मेरे भाषण का केवल एक ही हिस्सा दिखाई दे रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि वीडियो का बाकी हिस्सा विपक्ष ने डिलीट करवा दिया था। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने दावा किया कि यह पश्चिम बंगाल की सत्ता में आसीन पार्टी के लोकतंत्र के प्रति अनादर को प्रदर्शित करता है।
रविवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो में घोष पार्टी कार्यकर्ताओं से कहते हैं, 'हम उस दिन का इंतजार कर रहे हैं जब दोमजुर में 2023 में होने वाले पंचायत चुनावों में विपक्ष का कोई उम्मीदवार नहीं होगा। अगर विपक्ष का कोई प्रत्याशी हुआ भी तो सुनिश्चित करिए कि उसे एक भी वोट न मिलने पाए।' कल्याण घोष ने 2021 में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी राजीव बंदोपाध्याय को हराकर जीत हासिल की थी।
विधायक कल्याण घोष ने अपने बचाव में दी सफाई
समाचार एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार इस वीडियो के सामने आने के बाद टीएमसी विधायक घोष ने कहा, 'मैंने कहा था कि लोग पहले से ही मजबूती से हमारे साथ हैं। लेकिन हमें अपने संगठन का निर्माण इस तरह करना चाहिए कि हर व्यक्ति दीदी (मुख्यमंत्री ममता बनर्जी) की विकास पहलों में सहयोगी बन सके और विपक्ष को नाटकीय तरह से एक भी वोट न मिल पाए।' घोष का यह वीडियो सामने आने के बाद भाजपा आक्रामक हुई है।
भाजपा ने कहा, इससे टीएमसी का असली रंग दिखा
भाजपा के प्रदेश सचिव उमेश राय ने कहा कि यह टीएमसी का असली रंग और लोकतंत्र के प्रति उनके असम्मान को दिखाता है। उन्होंने कहा कि 2018 में पिछले पंचायत चुनावों के दौरान खूब फर्जीवाड़ा हुआ था। विपक्षी उम्मीदवारों पर हमले हुए थे। कई प्रत्याशी नामांकन तक नहीं दाखिल कर पाए थे। अगर टीएमसी इसे दोहराना चाहती है तो फिर चुनाव की जरूरत ही क्या है? उसे पहले ही अपने प्रत्याशियों को विजेता घोषित कर देना चाहिए।
वहीं, इस पूरे मामले को लेकर जब टीएमसी के वरिष्ठ नेता सोवनदेव चटर्जी से सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मुझे यह नहीं पता है कि असल में घोष ने क्या कहा था। इसकी जानकारी किए बगैर मैं कोई टिप्पणी नहीं कर सकता हूं।