उधर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस सरकार 'मां, माटी और मानुष' की सरकार है, और ये तीन तत्व ऐसे हैं जो बेईमानी नहीं कर सकते, धोखा नहीं दे सकते या झूठ नहीं बोल सकते। हम झूठ बोल कर वोट नहीं लेते हैं, हम जो कहते हैं वो करते हैं। यह टीएमसी की शपथ है।
बनर्जी ने कहा कि चंबल के कुछ डकैत और बाहर के कुछ गुंडे बंगाल में घुस आए हैं। कई वह पुलिस को धमकी देते हैं तो कभी टीएमसी को धमकाते हैं। आज टीएमसी की जड़ें एक बरगद के पेड़ की तरह गहरी हैं। दो-तीन लोग जो जानते हैं कि उन्हें टिकट नहीं मिलेगा, वो पार्टी छोड़कर जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कभी वह कहते हैं कि सीएए लागू किया जाएगा और एनआरसी नहीं। कभी वह कहते हैं कि एनआरसी लागू की जाएगी और एनपीआर अमल में नहीं लाया जाएगा। लेकिन मैं आज कह रही हूं कि वो ये तीनों काम करेंगे। मैंने अपने राज्य में एनपीआर को न अनुमति दी है और न दूंगी।
शुवेंदु अधिकारी ने विधायक पद से इस्तीफा देने के कुछ घंटे बाद बुधवार को वरिष्ठ सांसद सुनील मंडल और आसनसोल नगर निगम के प्रमुख जितेंद्र तिवारी समेत पार्टी के असंतुष्ट नेताओं के साथ मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार बंद कमरे में हो रही बैठक शाम सात बजे शुरू हुई और अभी जारी है।
अधिकारी पश्चिम बर्द्धमान जिले में कांकसा में मंडल के आवास पर उनसे मिलने गए। सूत्रों ने बताया कि बर्द्धमान पूर्व लोकसभा क्षेत्र के दो बार के सांसद मंडल ने अधिकारी का स्वागत किया। वह सुबह अधिकारी के समर्थन में सामने आए थे और शिकायतों को दूर न करने के लिए पार्टी पर दोष मढ़ा था।
कुछ देर बाद तिवारी भी मंडल के आवास में जाते हुए नजर आए। तिवारी ने राजनीतिक कारणों से केंद्रीय कोष से आसनसोल को वंचित रखने के लिए राज्य सरकार की आलोचना की थी। तिवारी पांडवेश्वर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं । बीरभूम, बर्द्धमान के कुछ तृणमूल नेता भी बैठक में शामिल हुए हैं।
तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय ने कहा कि हमने एक दिसंबर को शुवेंदु अधिकारी से बात की थी लेकिन दो दिसंबर को उन्होंने कहा था कि हम साथ काम नहीं कर सकते। उस दिन हमने निर्णय लिया था कि अब उनसे कोई बात नहीं की जाएगी। हम उनकी महात्वाकांक्षाओं को पूरा नहीं कर सकते, वह ममता बनर्जी के बाद का नेता बनना चाहते थे और पार्टी इसे स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थी।
उन्होंने कहा कि शुवेंदु अधिकारी पांच-छह जिलों पर नियंत्रण चाहते थे, जो कि संभव नहीं था। उन्हों कभी बताया नहीं लेकिन वह मुख्यमंत्री या उप मुख्यमंत्री का पद चाहते थे। मुझे जानकारी मिली है कि शुवेंदु भाजपा में शामिल हो जाएंगे। ऐसा लगता है कि इन परीक्षा के दिनों में कमजोर और लालची लोग पार्टी छोड़ेंगे।
उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं लगता कि शुवेंदु अधिकारी को भाजपा में अच्छा स्थान मिलेगा। उस पार्टी में पहले ही कुछ लोग नेता हैं। क्या वो अधिकारी के लिए अपना स्थान छोड़ देंगे? क्या मुकुल राय को भाजपा में शामिल होने के बाद अच्छी स्थिति मिली? शुवेंदु के साथ भी एसा ही होगा।'
सौगत रॉय ने कहा कि शुवेंदु अधिकारी ने पार्टी को धोखा दिया है। उन्होंने कहा कि पार्टी के चुनाव निशान पर दो बार राज्य सभा और लोकसभा सीट जीतने के बाद और साढ़े चार साल मंत्री रहने के बाद, विधानसभा चुनाव से महज छह महीने पहले पार्टी छोड़ देना धोखेबाजी है। रॉय ने कहा कि अगर अधिकारी तृणमूल कांग्रेस से बाहर ही जाना चाहते थे तो उन्हें दो साल पहले ही पार्टी छोड़ देनी चाहिए थी।
तृणमूल कांग्रेस में बुधवार को असंतोष के स्वर और तेज हो गए और इसी कड़ी में पार्टी के वरिष्ठ सांसद सुनील मंडल के साथ ही आसनसोल नगर निकाय के प्रमुख जितेंद्र तिवारी, शुवेंदु अधिकारी के समर्थन में खुलकर सामने आए। उन्होंने पार्टी पर समय रहते शिकायतों का निवारण नहीं करने का आरोप लगाया।
बर्द्धमान पुरबा से दो बार के लोक सभा सांसद सुनील मंडल ने पार्टी की अंदरूनी कलह और भ्रष्टाचार को नियंत्रित करने में लापरवाही बरतने का आरोप नेतृत्व पर लगाया। मंडल ने कहा, 'शुवेंदु अधिकारी अच्छे नेता हैं और उनका मजबूत जनाधार है। उनके पार्टी छोड़ने से चुनाव में तृणमूल कांग्रेस पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा।'
इस बीच, आसनसोल नगर निकाय के प्रमुख जितेंद्र तिवारी ने बुधवार को अधिकारी को पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के बाद तृणमूल कांग्रेस का दूसरा सबसे लोकप्रिय नेता करार दिया। तिवारी ने एक रैली को संबोधित करते हुए कहा कि बतौर पश्चिम बर्द्धमान जिला अध्यक्ष, यह उनका अंतिम संबोधन हो सकता है।
उन्होंने कहा, ' पार्टी के बारे में कुछ भी कहने वालों को पार्टी छोड़कर जाने को कहा जा रहा है। ममता बनर्जी के बाद शुवेंदु अधिकारी पार्टी के दूसरे सबसे बड़े जनाधार वाले नेता हैं। जब मैंने अपनी समस्याएं जाहिर कीं तो नगरपालिका मामलों के मंत्री फिरहाद हाकिम ने मुझे भाजपा में शामिल होने को कहा।'
इससे पहले मंगलवार को शुवेंदु अधिकारी ने स्थानीय और बाहरी लोगों के संबंध में चल रही बहस को लेकर तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि अन्य राज्यों से आने वाले लोगों को बाहरी नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि वह पहले भारतीय हैं और फिर बंगाली हैं। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व की भी आलोचना करते हुए कहा था कि वह लोगों की अपेक्षा पार्टी को अधिक महत्व दे रहा है।
भाजपा में शामिल हो सकते हैं अधिकारी
अगले साल पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने हैं और सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के लिए आसार गड़बड़ नजर आ रहे हैं। माना जा रहा है कि तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद अब शुवेंदु अधिकारी भाजपा में शामिल हो सकते हैं। बंगाल भाजपा भी कहती रही है कि तृणमूल के असंतुष्ट नेताओं के लिए उसके दरवाजे खुले हैं।