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जेल में तिनका-तिनका उम्मीद का उत्सव, कैदियों को दिए गए तिनका-तिनका इंडिया पुरस्कार

Mon, 09 Dec 2019 02:23 PM IST
अमित मंडल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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तिनका तिनका पुरस्कार
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मानवाधिकार दिवस पर दिए जाने वाले तिनका तिनका इंडिया अवॉर्ड आज लखनऊ की जिला जेल में जारी किए गए। तिनका तिनका इंडिया अवॉर्ड्स जेलों में सृजन करने वाले बंदियों और विशेष काम कर रहे जेल अधिकारियों का सम्मान करते हैं। जानी-मानी जेल सुधारक वर्तिका नंदा ने तिनका-तिनका अवार्ड्स की परिकल्पना की है। हर साल तिनका तिनका इंडिया अवॉर्ड्स चयनित बंदियों और जेल कर्मचारियों की उपस्थिति में देश की किसी जेल में जारी किए जाते हैं। लगातार पांचवीं साल पुरस्कार दिए गए। कारागार महानिदेशक आनन्द कुमार, उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक सुलखान सिंह और तिनका-तिनका संस्थापक वर्तिका नंदा ने ये पुरस्कार दिए। इस साल पुरस्कारों की तीन श्रेणियां रहीं- पेंटिंग, विशेष प्रतिभा और जेल प्रशासकों के लिए पुरस्कार। 
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छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जेल में बंद अजय को इस साल पेंटिंग में प्रथम पुरस्कार दिया गया। दूसरा पुरस्कार भोपाल केंद्रीय जेल के संजय फूल सिंह को दिया गया। तीसरा पुरस्कार उत्तर प्रदेश के दो बंदियों सहारनपुर जिला जेल के 56 वर्षीय निगम पंवार को और बरेली जिला जेल के बंदी 30 वर्षीय दिनेश कुमार को संयुक्त रूप से मिला। 

पेंटिग में 9 सांत्वना पुरस्कार भी दिए गए। इस बार छत्तीसगढ़ की सेंट्रल जेल, बिलासपुर को तीन पुरस्कार दिए गए। प्रेम सिंह, पूनम शाक्य, अरूण राणा, सचिन राय, राजा राम को सांत्वना पुरस्कार मिला है। विशेष प्रतिभा की श्रेणी में 8 बंदियों को पुरस्कार दिए गए हैं।
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नवीन आहूजा तिहाड़ जेल में सजायाफ्ता बंदी हैं। जेल में रहते हुए उन्होंने बी.कॉम. की डिग्री और कंप्यूटर में निपुणता हासिल की है। 25 साल की संध्या उत्तर प्रदेश की बांदा जेल में सजायाफ्ता हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल भारत को सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्त कराने के मिशन को आगे बढ़ाते हुए संध्या जेल में कपड़े के थैले बना रही हैं।  



विशेष प्रतिभा में आगरा जिला जेल के उदय स्वरूप और तुहिना को तिनका तिनका जेल सुधार मॉडल से जेल रेडियो चलाने के लिए सम्मानित किया गया। फिरोजाबाद जिला जेल में बंद 35 वर्षीय कमलेश अपनी साथी महिला बंदियों को बीमारी और जरूरत के समय में अनुकरणीय सहायता देती हैं। 22 साल की योगेश्वरी भोपाल जेल में सजायाफ्ता हैं। वह एक योग्य मनोवैज्ञानिक हैं और वह महिला बंदियों के जीवन में सुधार लाने के लिए सकारात्मक और रचनात्मक प्रयास कर रही हैं।

28 वर्षीय चरण सिंह राजस्थान की अलवर सेंट्रल जेल में सजायाफ्ता हैं। इन्होंने जेल कॉलिंग सिस्टम का उपयोग करने के लिए बंदियों की मदद करके जेल प्रणाली की मदद की है। वह जेल रेडियो में जॉकी भी हैं। 60 वर्षीय, उत्तम शांतराम पोतदार इन-हाउस जेल रेडियो में एक रेडियो जॉकी के रूप में काम कर रहे हैं, जिसे "एफएम लाई भर्री" कहा जाता है।  

आठ जेल अधिकारियों को भी इस साल तिनका तिनका अवार्ड दिए गए। बांदा के जेलर रंजीत कुमार सिंह, लखनऊ से संतोष कुमार सिंह, कौशांबी से बी एस मुकुंद, मैनपुरी से ब्रजेश कुमार, नारी बंदी निकेतन लखनऊ से शबनम निगार, महाराष्ट्र से समाकांत चंद्रकांत शडगे, कपूरथला से सुरिंदर पाल खन्ना, अलवर से भरत लाल मीणा को सम्मानित किया गया है। लखनऊ जिला कारागार के सुपरिटेंडेंट पी एन पांडे को विशेष जेल सेवा सम्मान दिया गया। 
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इस मौके पर जेलों पर वर्तिका नंदा की किताब तिनका तिनका डासना का भी विमोचन किया गया। वर्तिका नंदा जेल सुधारक हैं और तिनका तिनका भारतीय जेलों पर उनकी श्रृंखला है। वह 2014 में भारत के राष्ट्रपति से स्त्री शक्ति पुरस्कार से सम्मानित हो चुकी हैं। 
 
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