यह पॉडकास्ट अंबाला के केंद्रीय कारागार में बंद महिला कैदियों पर आधारित था। अंबाला केंद्रीय कारागार देश की ऐतिहासिक जेलों में से एक है। 'तिनका-तिनका' फाउंडेशन ने 2020 में हरियाणा राज्य में जेल रेडियो शुरू किया था। इस पहल के एक हिस्से के रूप में दिसंबर 2020 में नंदा ने एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए 21 कैदियों का चयन किया गया था। उन्होंने जेल परिसर में नव स्थापित रेडियो स्टेशनों में आरजे बनने के लिए बंदियों को प्रशिक्षण दिया। हरियाणा की जेलों में महिलाओं और ट्रांसजेंडर सहित 300 से अधिक कैदियों को आरजे (रेडियो जॉकी) के रूप में प्रशिक्षित किया गया है।
पॉडकास्ट सीरीज के 36वें एपिसोड के बारे में
यह विशेष एपिसोड अंबाला की केंद्रीय जेल में बंद महिला कैदियों की यात्रा और जेल रेडियो के साथ उनके जुड़ाव के बारे में बताता है। ये कैदी रेडियो कौशल उत्पादन प्रशिक्षण कार्यक्रम का हिस्सा थे। पॉडकास्ट सीरीज के अवॉर्ड जीतने वाले 36वें एपिसोड की परिकल्पना नंदा ने की है। इसके साथ ही आवाज भी उन्होंने खुद ही दी है। इसका संपादन हर्षवर्धन ने किया है। वर्तिका नंदा दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्रीराम कॉलेज में पत्रकारिता विभाग की प्रमुख हैं। हर्ष वर्धन एक युवा पत्रकार हैं, जो एक मीडिया हाउस में काम करते हैं। यह पॉडकास्ट सीरीज यूट्यूब पर प्रसारित की जाती है।
जेलों पर इकलौता पॉडकास्ट है तिनका-तिनका
'तिनका-तिनका' पॉडकास्ट देशभर की जेलों के लिए एक विशेष ऑडियो सीरीज हैं। यह देश में एकमात्र ऐसे पॉडकास्ट हैं, जो पूरी तरह से जेल सुधारों के लिए समर्पित हैं। इनका मकसद जेलों में सकारात्मक बदलाव लाना है। यह पॉडकास्ट साल 2020 में बिना किसी वित्तीय सहायता के शुरू किए गए थे। यह देश की विभिन्न जेलों में बंद कैदियों की मूल आवाज को सामने लाने में सफल रहे हैं। इन पॉडकास्ट को यूट्यूब, स्पॉटीफाई, गूगल पॉडकास्ट और एप्पल पॉडकास्ट समेत अन्य कई प्लेटफॉर्म्स पर सुना जा सकता है। इनकी परिकल्पना, आलेख और आवाज तिनका तिनका फॉउंडेशन की संस्थापक नंदा की है। इस सीरीज के अधिकांश पॉडकास्ट हर्षवर्धन ने संपादित किए हैं।
ये पॉडकास्ट 'तिनका मॉडल ऑफ प्रिजन रिफॉर्म्स' का एक विशेष हिस्सा हैं। अब तक कुल 73एपिसोड प्रसारित किए जा चुके हैं। तिनका-तिनका पॉडकास्ट की टैगलाइन है- ‘जेलों में इंद्रधनुष बनाने की कोशिश।' ‘पॉपुलेशन फर्स्ट’ और 'संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष' (यूएनएफपीए) द्वारा संयुक्त रूप से हर साल दिए जाने वाले इस अवॉर्ड का यह 13वां संस्करण है। वर्ष 2023 के लिए पूरे देश से 13 भाषाओं में 850 से अधिक प्रविष्टियों में से चुने विजेता चुने गए।
इस आयोजन के मुख्य अतिथि बाबा आमटे दिव्यांग विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. देव स्वरूप थे। जबकि विशिष्ठ अतिथि के रूप में राजस्थान राज्य समाज कल्याण बोर्ड की अध्यक्ष डॉ. अर्चना शर्मा, पंडित जवाहर लाल नेहरू बाल साहित्य अकादमी, राजस्थान के अध्यक्ष इकराम राजस्थानी, यूएनएफसी की कार्यक्रम प्रबंधन विशेषज्ञ अनुजा गुलाटी शामिल रहे। राजस्थान विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार केंद्र के पूर्व प्रमुख प्रोफेसर संजीव भानावत और दूरदर्शन एवं आकाशवाणी की एंकर प्रियंका कटारिया ने इस कार्यक्रम की मेजबानी की। इस साल कुल 87 पत्रकारों को लैंगिक संवेदनशीलता के लिए लाडली मीडिया एडवरटाइजिंग अवॉर्ड दिया गया, जबकि 31 को जूरी प्रशंसा प्रशस्ति पत्र मिले।