एक स्वस्थ नर बाघ के लिए 50 से 60 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र जरूरी होता है, जबकि मादा बाघ का गुजारा 15 से 20 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में चल जाता है। बाघों पर कई अंतरराष्ट्रीय डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाने वाले वन्य जीव विशेषज्ञ अजय सूरी कहते हैं कि एक नर बाघ के इलाके में तीन से चार बाघिन रहती हैं। लेकिन बाघों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर उनमें अपने दबदबे वाले इलाके के लिए आपसी संघर्ष होने लगा है, जिसमें कई बाघ मारे जा रहे हैं।
केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने सोमवार को दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान देश में दो प्रतिशत वन क्षेत्र की वृद्धि हुई है। इसे तेजी से आगे बढ़ावे का प्रयास होगा ताकि बाघों को निवास की कमी न पड़े। लेकिन बाघ संरक्षण परियोजना से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि दिक्कत वन क्षेत्र की नहीं है, बल्कि बाघों के लिए जरूरी सघन वन क्षेत्र की है, जो विभिन्न कारणों से कम होता जा रहा है।