रक्षा सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सेना के तीनों अंग पहले अलग-अलग रहकर काम करते थे। लेकिन, अब वे बेहतर समन्वय के साथ मिलकर हर चुनौती से निपटने के लिए तैयार हैं। रक्षा मंत्री ने कहा, वित्तीय वर्ष 2023-24 में 4,35,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की पूंजी अधिग्रहण परियोजनाओं को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई और सरकार अगले पांच वर्षों में भारत में एयरो इंजन और गैस टर्बाइन जैसी प्रणालियो के उत्पादन का लक्ष्य लेकर चल रही है।
राजनाथ सिंह ने कहा, सरकार सेना, नौसेना और वायुसेना के एकीकरण पर फोकस कर रही है, जो संकट के समय में समन्वय को बढ़ाएगी। उन्होंने कहा, पहले सेना के तीनों अंग अलग-अलग काम करते थे। हमने उनके एकीकरण पर फोकस किया। यह परंपरा से हटकर कदम था। लेकिन यह वक्त की जरूरत था। शुरुआत में इसमें थोड़ा दिक्कतें थीं। लेकिन आज हमारी सेना बेहतर समन्वय के साथ मिलकर हर चुनौती से निपटने के लिए तैयार है।
उन्होंने आगे कहा, कम समय में हथियारों के आयात पर प्रतिबंध लगाना मुश्किल है। लेकिन चुनौती धीरे-धीरे अवसर में बदल रही है। भारत दुनिया के रक्षा औद्योगिक परिदृश्य में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, आज हमारी सेना उन हथियारों और प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रही है, जिनका निर्माण हमारी अपनी धरती पर किया गया है। रक्षा मंत्री ने कहा, कोई भी सेना बाहर से आयातित उपकरणों से अपने देश की रक्षा नहीं कर सकती है। रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता आज के समय में भारत के लिए जरूरी है।
उन्होंने कहा, इससे पहले भारत को हथियार आयातक देश के रूप में जाना जाता था। लेकिन, आज प्रधानमंत्री के नेतृत्व में हम अपने कंफर्ट जोन से बाहर आ गए हैं। भारत ने शीर्ष 25 हथियार निर्यातक देशों की सूची में जगह बनाई है। उन्होंने कहा, सात-आठ साल पहले रक्षा निर्यात एक हजार करोड़ रुपये तक भी नहीं पहुंचा था। आज यह 16 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। 2028-29 तक वार्षिक रक्षा उत्पादन तीन लाख करोड़ रुपये और रक्षा निर्यात 50 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है।
सरकार ने रक्षा क्षेत्र में 'मेक इन इंडिया' को आगे बढ़ाया: डीआरडीओ प्रमुख
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के प्रमुख समीर वी कामत ने कहा कि भारत को रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की सरकार प्रतिबद्धता से इस क्षेत्र में लंबी छलांग लगी है। मेक इन इंडिया की सफलता की कहानी के बारे में पूछे जाने पर कामत ने कहा, कई कारकों ने इस कहानी को संभव बनाया है। इनमें पहले कारक यह था कि आत्मनिर्भर बनना है। मुझे लगता है कि यह सबसे महत्वपूर्ण कारक था, जिसने कहानी को बदल दिया।
उन्होंने कहा, हम लंबे समय से आत्मनिर्भरता की बात कर रहे थे। लेकिन सरकार की ओर से कोई मजबूत संकल्प नहीं था। एक बार जब मौजूदा सरकार सत्ता में आई तो उन्होंने वास्तव में आत्मनिर्भरता के प्रयासों को आगे बढ़ाया है।