अकेले खाड़ी देशों से तीन लाख लोगों ने भारत लौटने के लिए पंजीकरण कराया है, लेकिन सब नहीं आ सकेंगे। विदेश सचिव हर्ष वर्धन श्रृंगला ने कहा कि सभी को लाया जाना संभव नहीं है।
विदेश सचिव ने कहा कि विदेश से लाए जाने वाले लोगों में उन्हीं को लाया जाएगा, जिसके पास कोविड-19 संक्रमण न होने का प्रमाणपत्र होगा। उन्हें हवाई जहाज पर चढ़ने के पहले ही खाना आदि दे दिया जाएगा, ताकि दोबारा फ्लाइट को सैनिटाइज न करना पड़े।
प्रवासियों को लाने से पहले उन्हें वहां थर्मल स्क्रीनिंग समेत अन्य परीक्षण से गुजरना होगा। देश के हवाई अड्डे पर आने के बाद प्रवासियों को स्वास्थ्य परीक्षण से गुजरना होगा। उन्हें क्वारंटीन करके मॉनिटरिंग की जाएगी और पूरी तरह से आश्वस्त होने के बाद लोग अपने घर या गंतव्य पर जा सकेंगे।
विदेश सचिव ने स्पष्ट किया कि लोग नॉन- कमर्शियल शिड्यूल्ड फ्लाइट से लाए जा रहे हैं। आने के लिए यात्रा खर्च, क्वारंटीन, जांच समेत अन्य खर्च प्रवासी ही भुगतान करेंगे। भारतीय विदेश मंत्रालय के 20-25 संयुक्त सचिव, डिप्टी सेक्रेटरी समेत अन्य विदेश सेवा के अधिकारी इसे कोऑर्डिनेट करेंगे।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय हवाई जहाज से लाने की प्रक्रिया को पूरा करेगा और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा निर्धारित स्वास्थ्य प्रोटोकॉल का पालन करके लोगों को भारत आने की सुविधा दी जाएगी।
विदेश सचिव ने बताया कि नेपाल, बांग्लादेश से भी लोग भारत आना चाह रहे हैं। इसके लिए भी आवेदन आए हैं। उन्होंने कहा कि भारत सरकार दूतावासों के माध्यम से आने की प्रक्रिया शुरू कर रही है।
इसके लिए सड़क के रास्ते से आने वाले प्रवासियों को राज्य की सीमा में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के निर्धारित प्रोटोकाल का पालन करना होगा। राज्य सरकारें उन्हें क्वारंटीन की अवधि और स्वास्थ्य संबंधी जांच पूरी होने के बाद घर जाने देंगी।