उन्होंने बताया कि पड़ोसी राज्य कर्नाटक की एक जेल के अंदर से गडकरी को कथित तौर पर धमकी भरे फोन करने वाले जयेश पुजारी उर्फ सलीम शाहिर पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं के साथ-साथ सख्त गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत आरोप लगाए गए हैं और शहर, राज्य पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी उससे पूछताछ कर रहे हैं।
अधिकारी ने बताया कि हत्या के दोषी पुजारी को नागपुर में गडकरी के जनसंपर्क कार्यालय में धमकी भरे फोन करने के आरोप में हाल ही में कर्नाटक के बेलगावी जिले की हिंडाल्गा केंद्रीय जेल से हिरासत में लिया गया था और उसके पास से दो मोबाइल फोन और इतनी ही संख्या में सिम कार्ड जब्त किए गए थे।
पुलिस के अनुसार, भगोड़े गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम के सहयोगियों, अल कायदा, लश्कर-ए-तैयबा और प्रतिबंधित पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के गुर्गों के साथ उसके संबंध पाए जाने के बाद यूएपीए के प्रावधानों को लागू किया गया था। पुलिस की जांच में पता चला है कि पुजारी को पूर्वोत्तर राज्य में आतंकवादी समूहों द्वारा आईईडी चलाने का प्रशिक्षण दिया गया था।
अधिकारी ने कहा कि पुजारी ने दावा किया है कि उसने इस्लाम धर्म अपना लिया था और उसने पैसे ऐंठने के लिए गडकरी के जनसंपर्क कार्यालय में तीन बार फोन करने की बात कबूल की है। इस साल 14 जनवरी को पुजारी ने कथित तौर पर गडकरी के कार्यालय में फोन किया और खुद को दाऊद गिरोह का सदस्य बताया और 100 करोड़ रुपये की मांग की।
पुलिस के अनुसार, 21 मार्च को उसने एक और फोन किया, जिसमें 10 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं करने पर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी गई।
और भी पढ़ें...