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केंद्रीय सुरक्षा बलों के छुट्टी पर गए पौने दो लाख कर्मियों की वापसी शुरू, चरणों में होगी ज्वाइनिंग

Wed, 13 May 2020 07:16 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • 55 साल या इससे अधिक की आयु वाले कर्मियों को दूसरे चरण में लाया जाएगा
  • जवान अपने परिवार को नहीं ला सकेंगे, प्रेगनेंट महिला कर्मियों को प्रथम चरण में नहीं लाएंगे
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CRPF DG AP Maheshwari - फोटो : CRPF (File)
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विस्तार
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लॉकडाउन 4.0 लागू होने से पहले ही केंद्रीय सुरक्षा बलों के पौने दो लाख जवानों की वापसी शुरू हो गई है। अधिकारियों और जवानों की सुरक्षित वापसी के लिए कोरोना प्रूफ प्लान तैयार किया गया है। ये सभी वे कर्मी हैं, जो लॉकडाउन 1.0 से पहले अपने घर छुट्टी पर गए हुए थे और फिर वहीं फंस गए।

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वापसी की प्रक्रिया के दौरान कई स्तरों पर मेडिकल जांच की व्यवस्था की गई है। सीआरपीएफ में 55 साल या इससे अधिक की आयु वाले कर्मियों को दूसरे चरण में लाया जाएगा, जबकि बीएसएफ और आईटीबीपी ने अपने सभी जवानों को एक साथ लाने की मुहिम शुरू की है

छुट्टी से लौटने वाले जवानों को बल के ग्रुप सेंटर में नहीं रखा जाएगा। उनका क्वारंटीन सेंटर, बैरक, मेस और टायलेट सब अलग रहेंगे। सब्जी लाने वाला, काटने वाला और परोसने वाला, ये सब काम अलग-अलग व्यक्ति करेंगे।
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जवान अपने साथ परिवार को नहीं ला सकेंगे। साथ ही प्रेगनेंट महिला कर्मियों को प्रथम चरण में नहीं लाएंगे। उनके लिए बाद में व्यवस्था होगी।

सभी केंद्रीय बलों ने अपने स्तर पर शुरू की है मुहिम

छुट्टी पर गए कर्मियों को वापस लाने के लिए सभी बलों ने अपने स्तर पर मुहिम शुरू की है। देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल सीआरपीएफ ने भी इसके लिए लंबा-चौड़ा प्लान तैयार किया है। इस बल के करीब 53 हजार कर्मियों को ड्यूटी पर वापस लाना है।

सीआरपीएफ डीजी डॉ. एपी महेश्वरी ने जो आदेश जारी किया है, उसमें साफ लिखा है कि इसके लिए सभी तरह के प्रोटोकॉल मानने होंगे। छुट्टी से आने वाले जवान सामान्य बैरक में नहीं ठहरेंगे। उनके लिए अलग से मेस एवं टॉयलेट बनेंगे।

ग्रुप सेंटर या दूसरा ऐसा कोई भवन, जहां पहले से जवान रह रहे हैं, वहां क्वारंटीन सेंटर नहीं बनेगा। क्वारंटीन सेंटर के लिए नई जगह चिन्हित की जा रही है। इसके लिए कुछ राज्यों से आग्रह किया गया है कि जरूर पड़ने पर उनके कुछ भवन इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

अगर क्वारंटीन सेंटर बल की जगह पर बनता है तो उसका प्रवेश और निकासी द्वार अलग रहेगा। डॉक्टर नियमित जांच करेंगे। सैनिटाइजर और मास्क का इस्तेमाल कब कैसे होगा, इसके लिए विस्तृत एडवायजरी जारी की गई है।

बस, ट्रेन या सुरक्षा बल की गाड़ी से कोरोना के ग्रीन जोन में रह रहे जवानों को पहले लाया जाएगा। फोर्स ग्रुप सेंटर के निकटवर्ती जिलों को प्राथमिकता मिलेगी। अधिक दूरी वाले कर्मियों को दूसरे चरण में लाएँगे।

क्वारंटीन में आने वाले कर्मी कई चौंकाने वाली एक्सरसाइज देखेंगे

सभी कर्मियों को फोन यह सूचना दी जाएगी कि उन्हें कब चलना है। अपने घर से निकलने के बाद कर्मियों को कई चौंकाने वाली एक्सरसाइज देखने को मिलेंगी। जैसे उन्हें गाड़ी में कहां, कैसे बैठना है, वहां स्टाफ कैसा होगा, गाड़ी को एस्कॉर्ट करने वाले कौन होंगे, उनके साथ जो सामान आएगा, उसे कैसे सैनिटाइज किया जाएगा, आदि।

सरकारी वाहन में बैठने से पहले, बीच रास्ते में और क्वारंटीन सेंटर में घुसने से पहले उन्हें थर्मल स्कैनर की जांच से गुजरना होगा। 55 साल से अधिक आयु वाले कर्मियों की विशेष जांच होगी। हालांकि उन्हें दूसरे चरण में ले जाने की तैयारी हो रही है।

जिन कर्मियों को कोई गंभीर बीमारी है, उन्हें भी बाद में लाया जाएगा। साथ ही गर्भवती महिला कर्मी भी अभी ड्यूटी ज्वाइन नहीं करेंगी।

जिन्हें छुट्टी नहीं मिली, अब उन्हें घर भेजा जाएगा...

सभी केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में एक समय पर उनकी कुल संख्या का करीब 20 फीसदी स्टाफ छुट्टी पर होता है। सीआरपीएफ में 53 हजार, बीएसएफ में 40 हजार से ज्यादा, एसएसबी में 15 हजार, आईटीबीपी में भी 15 हजार से अधिक, सीआईएसएफ में 30 हजार और असम राइफल में लगभग 13 हजार जवान छुट्टी पर बताए गए हैं।

एनएसजी में भी करीब 14 सौ जवान छुट्टी पर हैं। लॉकडाउन 1.0 के दौरान इनकी वापसी के बाद बहुत से जवानों को छुट्टी जाना था, लेकिन वे नहीं जा पाए। अब उन्हें बारी-बारी छुट्टी मिलेगी। जिस तरह जवानों को वापस लाने की व्यवस्था हो रही है, उसी तरह से छुट्टी जाने वालों को घर भेजने की प्लानिंग बन रही है।

आईटीबीपी में 35 सौ और बीएसएफ में छह हजार से अधिक जवान वापस आ चुके हैं। बीएसएफ प्रवक्ता शुभेंदु भारद्वाज का कहना है कि हम छुट्टी से आने वाले जवानों को लेकर बहुत सचेत हैं। उनके लिए नई व्यवस्था की जा रही है।

सभी जवानों को पहले क्वॉरंटीन सेंटर में रखा जाएगा। सोशल डिस्टेंसिंग के चलते मेस और बैरक का सिस्टम बदल दिया गया है। मेस का काम है तो कोई भी एक जवान दो काम नहीं करेगा। यानी खाना पकाने वाला दूसरा कोई काम नहीं करेगा।

खाना परोसना है तो उसके लिए अलग व्यक्ति होगा। यहां तक कि सब्जी बनाने, लाने और काटने वाले भी अलग रहेंगे। बैरक, मेस से लेकर सभी दफ़्तर और अन्य कार्यस्थल को पूरी तरह से सैनिटाइज किया जा रहा है।

 

 

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