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देश में 1,445 लोगों की आबादी पर मात्र एक डॉक्टर, हरियाणा में स्थिति गंभीर

Thu, 21 Nov 2019 03:12 AM IST
गौरव पाण्डेय परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली

सार

  • राज्यसभा में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने डॉक्टरों की कमी पर पेश की रिपोर्ट
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार एक हजार की आबादी पर हो एक डॉक्टर
  • आयुष और एलोपैथी को मिलाकर देश में डॉक्टर-मरीज का अनुपात 1:860
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पेक्सेल्स
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विस्तार
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देश में डॉक्टरों की कमी को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यसभा में एक रिपोर्ट पेश की है जिसके अनुसार 1,445 लोगों की जिम्मेदारी केवल एक एलोपैथ के डॉक्टर के कंधों पर है। उत्तर भारत में सबसे बुरे हालात हरियाणा में हैं। यहां एक एलोपैथी डॉक्टर पर 6,287 लोगों की जिम्मेदारी है। जबकि उत्तर प्रदेश में 3,692, उत्तराखंड में 1,631, पंजाब में 778, हिमाचल प्रदेश में 3,015, जम्मू कश्मीर में 1,143 और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 1,252 लोगों के लिए एक एलोपैथी डॉक्टर पंजीकृत हैं। 

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आयुष (आयुर्वेद, योगा, यूनानी, सिद्धा, होम्योपैथी) चिकित्सा पद्धति के डॉक्टरों को इनके साथ जोड़ दें तो हरियाणा में 1,812 लोगों की आबादी पर मात्र एक डॉक्टर तैनात है, जो कि उत्तर भारत के बाकी राज्यों की तुलना में सर्वाधिक है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार एक हजार आबादी पर एक डॉक्टर होना चाहिए। सरकार ने एलोपैथी और आयुष डॉक्टरों का अनुपात अलग-अलग बताया है। इनका मानना है कि अगर दोनों चिकित्सा पद्धति के डॉक्टरों को मिला दिया जाए तो डॉक्टरों की संख्या पर्याप्त मिल रही है।

क्या कहती है रिपोर्ट

मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार देश में 11.59 लाख एलोपैथी के डॉक्टर पंजीकृत हैं लेकिन इनमें से 9.27 लाख डॉक्टर ही हर दिन अस्पताल या क्लीनिक में मरीज का उपचार कर रहे हैं। चूंकि देश की आबादी 1.35 बिलियन है, इस हिसाब से देश में 1,445 लोगों की आबादी पर एक एलोपैथी डॉक्टर मौजूद है। 

जबकि देश में मौजूदा 6.30 लाख आयुष डॉक्टरों को भी एलोपैथी के साथ जोड़कर चलें तो भारत में 867 लोगों पर एक डॉक्टर तैनात है। हालांकि मंत्रालय का ये भी मानना है कि देश में मरीजों की तादाद हर साल बढ़ रही है। ऐसे में सभी चिकित्सा पद्धतियों के तहत आने वाले डॉक्टरों की संख्या बढ़ाना बेहद आवश्यक है।
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डॉक्टरों को बढ़ाने के लिए मेडिकल कॉलेजों पर फोकस

मंत्रालय ने बताया कि डॉक्टरों की कमी को पूरा करने के लिए एमबीबीएस कोर्स की सीटों में 150 से 250 तक की वृद्घि, नए मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए नियमों में सरलता, जिला अस्पतालों को मेडिकल कॉलेज में अपग्रेड करना इत्यादि पर काम कर रही है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के लिए केंद्र की ओर से राज्य सरकारों की मदद की जा रही है।

देश में सबसे बुरे हालात मिजोरम-नागालैंड में

डॉक्टर-मरीज के बीच अनुपात को लेकर अगर पूरे देश की स्थिति पर गौर करें तो सबसे बुरे हालात मिजोरम और नागालैंड में देखने को मिल रहे हैं। यहां क्रमश: 20,343 और 23,396 की आबादी पर एक एलोपैथी डॉक्टर है। जबकि एलोपैथी के साथ आयुष डॉक्टरों को भी मिलाकर देखें तो इन राज्यों में क्रमश: 20,343 और 10,479 की आबादी पर एक डॉक्टर है। इनके अलावा छत्तीसगढ़ में 4045, झारखंड में 7,895, मध्यप्रदेश में 2,691, तेलंगना में 9,477 और त्रिपुरा में 2,934 लोगों पर एक एलोपैथी डॉक्टर है।

उत्तर भारत के राज्यों की स्थिति
 
राज्य एलोपैथी डॉक्टर (आबादी) एलोपैथी-आयुष डॉक्टर (आबादी)
हरियाणा 6287                     1812
उत्तर प्रदेश 3692 1756
उत्तराखंड 1631 1107
पंजाब 778 584
हिमाचल प्रदेश 3015 628
जम्मू कश्मीर 1143 812
बिहार 3536 812
दिल्ली 1252 797

(सभी आंकड़े : 31 मार्च 2019 तक)
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