दूसरी तरफ कर्मचारी संगठन, ओपीएस व दूसरी मांगों को लेकर एक बार फिर आंदोलन करने की तैयारी कर रहे हैं। पेंशन के मुद्दे पर 15 जुलाई को वित्त मंत्रालय की कमेटी की बैठक का बहिष्कार करने वाले अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ (एआईडीईएफ) के महासचिव सी. श्रीकुमार का कहना है, कर्मचारी वर्ग को ओपीएस चाहिए। इसे कम उन्हें कुछ भी मंजूर नहीं है। ओपीएस, आठवें वेतन आयोग का गठन व दूसरी मांगों को लेकर दो अगस्त को एआईडीईएफ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी, दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना देगी।
इससे पहले सोमवार को संसद सत्र के दौरान वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा था, कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन बहाली का कोई प्रस्ताव केंद्र सरकार के विचाराधीन नहीं है। केंद्रीय कर्मियों के वेतनमान और पेंशन में संशोधन के लिए 8वें वेतन आयोग के गठन का कोई प्रस्ताव नहीं है। वित्त राज्य मंत्री ने बताया, जून 2024 में आठवें वेतन आयोग के गठन को लेकर दो सिफारिशें प्राप्त हुई थीं। हालांकि वर्तमान में सरकार के पास ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। मंगलवार को बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कर्मचारियों को भरोसा दिलाया है कि एनपीएस को लेकर जल्द ही उनकी चिंताओं को दूर किया जाएगा। इसके लिए सरकार एक समाधान की घोषणा करेगी। एनपीएस को रिव्यू करने के लिए वित्त सचिव की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई है। ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी ने सरकार के साथ ओल्ड एज सोशल इन्कम सिक्योरिटी को सुनिश्चित करने के लिए फिसकल प्रूडेंस (राजकोषीय विवेक) के साथ समाधान निकालने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
सी. श्रीकुमार ने कहा, सरकार ने कर्मचारियों के साथ धोखा किया है। भले ही वित्त मंत्रालय की कमेटी की रिपोर्ट अभी नहीं आई है, लेकिन कर्मचारियों को सरकार पर भरोसा नहीं है। वजह, सरकार ने संसद में बताया है कि ओपीएस का बहाली का कोई भी प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ (एआईडीईएफ) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के पदाधिकारी दो अगस्त को दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना देंगे। इसके अलावा रक्षा क्षेत्र की 400 यूनिटों पर कर्मचारी धरना देंगे। इसके बाद दूसरे कर्मचारी संगठनों से विचार विमर्श कर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
राज्य कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले सबसे बड़े संगठन 'अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ' के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने कहा, बजट में कर्मचारियों की सभी मांगों की अनदेखी की गई है। इससे केंद्र एवं राज्य कर्मियों में भारी आक्रोश है। यह बजट कर्मचारी एवं मजदूर विरोधी और कारपोरेट प्रस्त है। इस बजट से निजीकरण को बढ़ावा मिलेगा। बजट में कर्मचारियों की प्रमुख मांगें, ओपीएस बहाली, आठवें पे-कमीशन का गठन, पीएफआरडीए एक्ट रद्द कर पुरानी पेंशन बहाली, ओपीएस बहाल करने वाले राज्यों के पूर्व में कटौती किए गए अंशदान की वापसी और ईपीएस 95 को पुरानी पेंशन के दायरे में लाना, ये मांगें गायब हैं। इसके अलावा, आयकर छूट की सीमा बढ़ाकर दस लाख करने, कोविड 19 में फ्रीज किए गए कर्मचारियों एवं पेंशनर्स के 18 महीने के डीए/डीआर का भुगतान, ठेका संविदा कर्मियों की रेगुलराइजेशन व समान काम समान वेतन और सेवा सुरक्षा प्रदान करने, पीएसयू का निजीकरण व सरकारी विभागों के आकार को सिकोड़ने तथा निगमीकरण पर रोक लगाना, इन पर भी वित्त मंत्री ने कुछ नहीं कहा है।
सुभाष लांबा ने कहा, बजट में केंद्र और राज्य सरकारों के अलावा पीएसयू में रिक्त पड़े करीब एक करोड़ पदों को पक्की भर्ती से भरने का भी कोई जिक्र नहीं किया गया है। अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ ने 9 जुलाई को केंद्रीय वित्त मंत्री को पत्र लिखकर बजट में कर्मचारियों की उपरोक्त मांगों को संबोधित करने का आग्रह किया था। बजट में कर्मियों की मांगों की पूरी तरह अनदेखी की गई है। दूसरी तरफ सरकार ने लेबल कोड्स को लागू करने का ऐलान कर दिया है। 13-14 अगस्त को राष्ट्रीय कार्यसमिति की हेदराबाद में होने वाली बैठक में पुनः राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करने पर फैसला लिया जाएगा।