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जोशी ने मोदी की अध्यक्षता में एकीकृत मैकेनिज्म बनाने की मांग की

Thu, 12 May 2016 02:19 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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मुरली मनोहर जोशी - फोटो : Getty
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 गंगा को निर्मल और अविरल बनाने के सरकार के प्रयासों पर संसदीय समिति ने असंतोष जताया है। अगले दो साल में गंगा को निर्मल बनाने के लिए समिति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय मैकेनिज्म बनाने का सुझाव रखा है। समिति के अध्यक्ष डा. मुरली मनोहर जोशी ने गंगा जीर्णोद्धार विषय पर एक रिपोर्ट पेश करते हुए कहा है कि गंगा के स्वच्छता को लेकर पीएम मोदी का महज देखना प्रर्याप्त नहीं है।
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उन्होंने कहा कि पीएम की अध्यक्षता में एक ऐसा एकीकृत मैकेनिज्म बनना चाहिए जिसमें केंद्र के सभी संबंधित मंत्रालयों के प्रतिनिधि, राज्यों के प्रतिनिधि और विशेषज्ञ शामिल हों। इस समिति को अपनी रिपोर्ट हर साल संसद को देनी होगी। संसदीय समिति को केंद्र के मंत्रालयों के बीच आपसी तालमेल का अभाव नजर आया है। जिसके वजह से गंगा स्वच्छता का कार्य प्रभावित हो रहा है। जोशी ने कहा कि गंगा के जीर्णेद्धार का कार्य अभी 5-7 मंत्रालयों के बीच में है। लेकिन अभियान को युद्धस्तर और मिशन मोड में चलाने के लिए एकीकृत ढ़ांचे की आवश्यक्ता है। 

वरिष्ठ भाजपा नेता ने पीएम मोदी से उम्मीद प्रकट करते हुए कहा है कि संसदीय समिति की रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद अगले 4 दिनों में गंगा स्वच्छता को लेकर बैठक करने वाले हैं। उन्होंने कहा कि यह गंगा के लिए बेहतर होगा कि पीएम समिति के सिफारिशों पर अमल करें। समिति ने गंगा को दो साल में अविरल और निर्मल बनाने का ब्लू प्रिंट सौंप दिया है। अब यह सरकार पर है कि वह इसे कैसे देखती है। अपरोक्ष रूप से जोशी ने गंगा स्वच्छता को लेकर सरकार के अब तक के प्रयासों को नाकाफी बताते हुए अपने सुझावों को बेहतर बताया है। 
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'नदियों पर बांध नुकसानदेह है'

मोदी के नेतृत्व में बनें दल - फोटो : Getty
गंगा के हालात पर चिंता जताते हुए मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि अंतराष्ट्रीय स्तर पर गंगा को मृत नदी की श्रेणी में डालना बेहद चिंता की बात है। देश के 43 प्रतिशत आबादी का भरण-पोषण करने वाली पवित्र नदी गंगा आज विश्व के सबसे 10 प्रदूषित नदियों में शामिल है। जोशी ने कहा कि लोगों को मोक्ष प्रदान करने वाली गंगा आज समाप्त होने की कगार पर है। इस राष्ट्रीय एवं पवित्र नदी को बचाने के लिए पीएम मोदी से संसदीय समिति ने प्रयास तेज करने का आह्वान किया है। 

यूपी में गंगा के हालात पर चिंता जताते हुए जोशी ने कहा कि कानुपर के नीचे गंगा की स्थिति बेहद चिंताजनक है। नदी के बजाय यह एक नाले के रूप में बह रही है। इसमें आर्सेनिक रसायन की मात्रा बेहद बढ़ी हुई है। संसदीय समिति के अनुसार गंगा में आर्सेनिक की मात्रा बढने से 7 करोड़ लोग प्रभावित हैं। लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ा है। करीब 1 लाख लोग इसके प्रभाव से बीमार होकर मर चुके हैं। समिति ने गंगा नदी पर बनने वाले बांधों का भी विरोध किया है। जोशी ने कहा कि दुनिया के देश और वैज्ञानिक यह बात कह रहे हैं कि नदियों पर बांध नुकसानदेह है। इस मामले में सरकार को भी विचार करना चाहिए। 

गंगा स्वच्छता के प्रयासों को नाकाफी बताते हुए संसदीय समिति ने कहा है कि बद्रीनाथ, देवप्रयाग, कर्णप्रयाग,  रूद्रप्रयाग, जोशीमठ, और वाराणसी में मलजल शोधन संयंत्रों के अनुमोदन को 7 से 8 वर्ष हो गए हैं। लेकिन उनका काम पूरा नहीं हो सका है। तो गंदा जल शोधन के लिए चल रहे एसटीपी भी अपनी क्षमता के अनुरूप कार्य नहीं कर रहे हैं। 
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