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सड़क दुर्घटनाः मौत से ज्यादा जुर्माने से क्यों डरते हैं लोग? मनोवैज्ञानिक ने बताए कारण

Sun, 08 Sep 2019 10:04 PM IST
Amit Sharma अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
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ट्रैफिक चालान(फाइल फोटो)
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सड़क दुर्घटनाओं में हर मिनट चार लोगों की मौत हो जाती है। इस तरह हर साल लगभग डेढ़ लाख ऐसे लोग अपनी जान गंवा देते हैं जिन्हें थोड़ी सी सावधानी बरतकर बचाया जा सकता है। लेकिन यह स्थिति कुछ अजीब है कि लोग सड़क दुर्घटना होने पर तो कड़े कानून न होने का हवाला देते थे, लेकिन अब जब कड़े कानून लागू हो चुके हैं, कई जगहों पर इसका विरोध भी किया जा रहा है। क्या लोगों को सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौत से डर नहीं लगता? जुर्माना तो केवल उन्हें ही देना है जो नियम तोड़ेंगे। ऐसे में क्या लोग सड़क नियमों की अवहेलना करने की छूट पाना चाहते हैं?

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लोगों का ऐसा व्यवहार क्यों है? इस सवाल पर दिल्ली के बीएलके अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. मनीष जैन अमर उजाला से कहते हैं कि स्वाभाविक रूप से हम किसी बदलाव के लिए तैयार नहीं होते। कोई भी नियम लंबे समय में हमारी आदत में शुमार हो जाता है जिससे कई बार हम चाहकर भी बदल नहीं पाते। लोग चाहते हैं कि उन्हें उनकी उसी व्यवस्था में चलते रहने दिया जाए। ऐसे में एक अच्छी आदत बनाने के लिए भी कुछ समय लगेगा, लेकिन कुछ समय बाद लोग इसे भी आज की तरह ही स्वीकार करने लगेंगे।

सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौत लोगों को सही नियमों से चलने के लिए प्रेरित क्यों नहीं करती? डॉ. जैन ने कहा कि हम केवल उन्हीं बातों से सीधे प्रभावित होते हैं जो सीधे हमारे अनुभव से होकर गुजरती हैं। ऐसे में इस तरह के अनुभव से दूसरे लोग अपेक्षाकृत कम प्रभावित होते हैं।
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क्या भारी जुर्माना लगाकर लोगों के स्वभाव को परिवर्तित करने का यह तरीका सही कहा जा सकता है? इस सवाल पर डॉ. मनीष जैन ने कहा कि व्यवहारगत समस्याओं को दुरुस्त करने के लिए यह आवश्यक है कि सजा इतनी हो कि व्यक्ति उसे सजा के तौर पर महसूस करे। जब तक जुर्माना 100 रुपये होता था, यह पूरी तरह असरहीन था। लेकिन जैसे ही जुर्माने की रकम बढ़ा दी गई, सड़कों पर यातायात में सुधार देखा जाने लगा है। जल्दी ही इसका बड़ा और अच्छा असर दिखाई पड़ेगा।  

मौत-घायलों की संख्या बहुत ज्यादा

सेव लाइफ फाउंडेशन के मुताबिक़ पिछले दस वर्षों में सड़क दुर्घटनाओं में कम से कम 13,81,314 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इसके आलावा इसी बीच 50,30,707 लोग गंभीर रूप से घायल भी हो हुए हैं। इन दुर्घटनाओं को रोकने के लिए विशेषज्ञ कठोर यातायात नियमों की वकालत करते हैं। 

नेशनल क्राइम रिकार्ड्स ब्यूरो (NCRB) की 2016 की रिपोर्ट के मुताबिक़ वर्ष 2015 में देश में कुल 4,96,762 दुर्घटनाएं हुईं। इनमें 1,48,707 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। देश में प्रति मिनट चार लोग सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान खो देते हैं। वर्ष 2015 में सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले लोगों में से एक तिहाई केवल उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और तमिलनाडु तीन राज्यों से थे।  गाड़ियों कीसंख्या के लिहाज से देखें तो प्रति एक लाख वाहनों में 90 वाहन सड़क दुर्घटनाओं का शिकार हुए। इसके कारण भारी आर्थिक नुकसान भी हुआ।     

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