सड़क दुर्घटनाओं में हर मिनट चार लोगों की मौत हो जाती है। इस तरह हर साल लगभग डेढ़ लाख ऐसे लोग अपनी जान गंवा देते हैं जिन्हें थोड़ी सी सावधानी बरतकर बचाया जा सकता है। लेकिन यह स्थिति कुछ अजीब है कि लोग सड़क दुर्घटना होने पर तो कड़े कानून न होने का हवाला देते थे, लेकिन अब जब कड़े कानून लागू हो चुके हैं, कई जगहों पर इसका विरोध भी किया जा रहा है। क्या लोगों को सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौत से डर नहीं लगता? जुर्माना तो केवल उन्हें ही देना है जो नियम तोड़ेंगे। ऐसे में क्या लोग सड़क नियमों की अवहेलना करने की छूट पाना चाहते हैं?
सेव लाइफ फाउंडेशन के मुताबिक़ पिछले दस वर्षों में सड़क दुर्घटनाओं में कम से कम 13,81,314 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इसके आलावा इसी बीच 50,30,707 लोग गंभीर रूप से घायल भी हो हुए हैं। इन दुर्घटनाओं को रोकने के लिए विशेषज्ञ कठोर यातायात नियमों की वकालत करते हैं।
नेशनल क्राइम रिकार्ड्स ब्यूरो (NCRB) की 2016 की रिपोर्ट के मुताबिक़ वर्ष 2015 में देश में कुल 4,96,762 दुर्घटनाएं हुईं। इनमें 1,48,707 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। देश में प्रति मिनट चार लोग सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान खो देते हैं। वर्ष 2015 में सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले लोगों में से एक तिहाई केवल उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और तमिलनाडु तीन राज्यों से थे। गाड़ियों कीसंख्या के लिहाज से देखें तो प्रति एक लाख वाहनों में 90 वाहन सड़क दुर्घटनाओं का शिकार हुए। इसके कारण भारी आर्थिक नुकसान भी हुआ।