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चिंताजनक: हिमालय में बर्फ का तापमान 4 डिग्री बढ़ा, वायु प्रदूषण से दो अरब लोगों पर जल संकट का खतरा

Mon, 02 Jun 2025 07:13 AM IST
शुभम कुमार अमर उजाला नेटवर्क

सार

शहरी प्रदूषण से हिमालय की बर्फ तेजी से गर्म हो रही है। 23 सालों में बर्फ की सतह का तापमान औसतन 4°C बढ़ा है। क्लाइमेट ट्रेंड्स की रिपोर्ट में चेताया गया है कि यह प्रवृत्ति जारी रही तो दक्षिण एशिया के दो अरब लोगों के जल स्रोत खतरे में पड़ सकते हैं।

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वायु प्रदूषण - फोटो : Freepik.com
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विस्तार
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शहरी वायु प्रदूषण से हिमालय तेजी से तप रहा है। यहां बर्फ की सतह का तापमान बीते दो दशकों में औसतन चार डिग्री सेल्सियस तक बढ़ गया है। दिल्ली स्थित शोध संस्था क्लाइमेट ट्रेंडस की ओर से किए गए अध्ययन हिमालयी हिमनदों पर ब्लैक कार्बन का प्रभाव : 23 वर्षों का प्रवृत्ति विश्लेषण में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।
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अध्ययन में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के 2000 से 2023 तक के उपग्रह आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है। विश्व की सबसे बड़ी जमी हुई जल-संपदाओं में से एक माने जाने वाले हिमालय को अक्सर तीसरा ध्रुव कहा जाता है। रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2000-2009 के दौरान हिमालयी बर्फ की सतह का औसत तापमान -11.27 डिग्री सेल्सियस था, जो 2020-2023 के बीच -7.13 डिग्री हो गया।

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इसका अर्थ है कि बर्फ की सतह अब पहले की तुलना में कहीं अधिक गर्म हो गई हैै। प्रमुख शोधकर्ता डॉ. पलक बलियान ने चेताया कि यदि यह प्रवृत्ति जारी रही तो दक्षिण एशिया के लगभग दो अरब लोगों की पीने और सिंचाई के लिए मिलने वाली मीठे पानी की आपूर्ति पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। विशेषकर पूर्वी हिमालय में स्थिति अधिक चिंताजनक है, जहां ब्लैक कार्बन का स्तर सबसे अधिक पाया गया। इसका कारण है गंगा के घने आबादी वाले इलाकों से इन क्षेत्रों की नजदीकी जहां परंपरागत चूल्हों, पराली जलाने और ट्रैफिक प्रदूषण की भरमार है।
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घातक है अदृश्य ब्लैक कार्बन
ब्लैक कार्बन यानी काला कार्बन मुख्यतः बायोमास जलाने, कोयला व डीजल जैसे जीवाश्म ईंधनों के प्रयोग और खुले में कचरा जलाने से बनता है। यह महीन कण वायुमंडल में उड़ते हुए दूर-दराज के इलाकों तक पहुंच जाते हैं। हिमालय की बर्फ पर जब ये कण जमते हैं तो सफेद सतह काली हो जाती है, जिससे उसकी सूर्य-प्रकाश परावर्तकता (रिफलेक्टिविटी) कम हो जाती है और बर्फ अधिक सौर ऊर्जा अवशोषित करने लगती है। इसका सीधा असर यह होता है कि बर्फ तेजी से पिघलने लगती है। हिमालयीन क्षेत्रों में जहां-जहां ब्लैक कार्बन का जमाव अधिक है, वहां बर्फ की सतह का तापमान भी अधिक है। इससे यह स्पष्ट होता है कि ब्लैक कार्बन ही बर्फ के तेजी से पिघलने का एक बड़ा कारक बन गया है।
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