विभिन्न राज्यों की जेलों में बंद कैदी अपनी सजा पूरी होने की राह देखते हैं। लेकिन कुछ कैदी ऐसे भी होते हैं, जो सजा पूरी होने के बावजूद अपने घर नहीं जा पाते। वे जेल में ही रहते हैं। कोई एक-दो दिन या सप्ताह नहीं, बल्कि महीनों तक उन्हें सलाखों के पीछे ही रहना पड़ता है। इसकी वजह है कि ये कैदी जुर्माना न भर पाने के कारण अतिरिक्त सजा काटते हैं। 31 दिसंबर 2019 की स्थिति के अनुसार, देश में 1031 कैदी ऐसे हैं, जो सजा पूरी होने के बाद जुर्माना नहीं भर सके। नतीजा, वे उसी जेल में अब अतिरिक्त सजा काट रहे हैं।
ऐसे सबसे ज्यादा कैदी उत्तर प्रदेश की जेलों में बंद हैं। यहां 192 कैदी ऐसे थे, जिनकी सजा खत्म होने के पश्चात उन्हें जेल में ही रहना पड़ा है। वजह, वे आर्थिक दंड का भुगतान नहीं कर सके। इसके चलते उनकी सजा बढ़ा दी गई। किसी कैदी को कुछ महीने, तो कोई लंबे समय के लिए जेल की कोठरी में बैठने को मजबूर है।
उत्तर पूर्व के राज्य मिजोरम और असम में भी ऐसे कैदियों की संख्या अधिक रही है। मिजोरम में 114 कैदियों की सजा समाप्त हो चुकी थी, लेकिन वे जेल से बाहर नहीं जा सके। इसी तरह असम की जेलों में भी 106 कैदी ऐसे रहे हैं, जिनके पास जुर्माना भरने के लिए पैसे नहीं थे तो वे अतिरिक्त सजा काट रहे हैं।
केरल में 111 कैदी अतिरिक्त सजा काट रहे थे। इनके पास भी आर्थिक दंड का भुगतान करने का कोई साधन नहीं था। दिल्ली में ऐसे कैदियों की संख्या 41, मध्यप्रदेश में 78, पंजाब में 67, राजस्थान में 66, हरियाणा 22, गुजरात 13, महाराष्ट्र 22 व पश्चिम बंगाल में 2017 के मुताबिक 56 कैदियों को अर्थ दंड न देने के कारण जेल से रिहा नहीं किया गया।
तमिलनाडु, जम्मू कश्मीर, गोवा, आंध्रप्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, नागालैंड, पुडुचेरी, लक्षद्वीप और सिक्किम में ऐसा कोई कैदी नहीं था, जो सजा पूरी होने के बाद भी जेल में रहा हो। यानी इन राज्यों में सभी कैदियों ने जुर्माना भर दिया या फिर यहां पर ऐसा कोई केस नहीं आया।