बीएसएफ अपने रिटायर्ड कर्मियों और अधिकारियों के निधन पर उनकी सम्मान सहित अंतिम विदाई सुनिश्चित करेगा। बीएसएफ अधिकारी अपने डीजी की तरफ से दिवंगत कर्मी की अंतिम यात्रा में शामिल होंगे। अंतिम संस्कार से पहले अधिकारी द्वारा सलामी दी जाएगी। डीजी की तरफ से बतौर सम्मान भेजी गईं फूल मालाएं दिवंगत कर्मी के शव पर रखी जाएंगी। अंतिम संस्कार के बाद दिवंगत कर्मी के परिवार को आर्थिक मदद भी मिलेगी। हालांकि यह मदद जरूरतमंद और परिस्थितियों को ध्यान में रखकर दी जाएगी। इसके तहत आठ हजार रुपये तक की राशि देने का प्रावधान किया गया है। कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह ने बीएसएफ डीजी राकेश अस्थाना की इस सराहनीय पहल का स्वागत किया है।
बीएसएफ के मुताबिक, सभी यूनिटों और मुख्यालयों को पत्र जारी कर दिया गया है। पत्र में कहा गया है कि बीएसएफ अपने कर्मियों को सदैव याद रखती है। उनके दुख-तकलीफों में साथ रहती है। अभी तक रिटायर्ड कर्मियों के निधन के बाद उनके अंतिम संस्कार में बल की तरफ से कोई नहीं पहुंचता था। जवानों और अधिकारियों को नैतिक बल प्रदान करने के लिए मौजूदा डीजी राकेश अस्थाना ने अब यह नई परंपरा शुरू की है। इसके जरिए मौजूदा कर्मियों को यह संदेश दिया गया है कि बीएसएफ केवल सर्विस के दौरान ही नहीं, बल्कि रिटायर्ड होने के बाद भी अपने कर्मियों के साथ एकजुटता से खड़ी रहती है।
इस योजना के तहत रिटायर्ड कर्मी के निधन पर उसके परिजनों द्वारा निकटवर्ती बल यूनिट या मुख्यालय को सूचित करना होगा। सूचना मिलते ही बल की तरफ से परिवार के साथ संपर्क किया जाएगा। बल अधिकारी, दिवंगत कर्मी के परिजनों को आठ हजार रुपये की राशि प्रदान करेंगे। बशर्ते उन्हें इसकी जरूरत महसूस होती हो। अगर किसी यूनिट के पास इस तरह के फंड की कमी है तो वह राशि बल के सेंट्रल वेलफेयर फंड से मिलेगी। इसके लिए संबंधित शाखा को अवगत करा दिया गया है। जैसे ही बीएसएफ को अपने रिटायर्ड कर्मी के निधन का समाचार मिलेगा, तो उस इलाके के दूसरे रिटायर्ड कर्मियों को सूचना दे दी जाएगी, ताकि वे भी अपने सहयोगी की अंतिम यात्रा में शामिल हो सकें।
दिवंगत कर्मी अगर आईजी या उससे बड़े रैंक से रिटायर हुआ है तो उसकी अंतिम यात्रा में कमांडेंट स्तर का अधिकारी पहुंचकर सलामी देगा। डीआईजी और उससे नीचे के कर्मियों की अंतिम यात्रा में सेकंड इन कमांड या डिप्टी कमांडेंट शामिल होंगे। एसओ व ओआर के लिए सहायक कमांडेंट और इंस्पेक्टर की ड्यूटी लगाई गई है।
अंतिम संस्कार के दौरान फोटो भी लिया जाएगा, ताकि बाद में उसे ऑडिट प्रक्रिया में इस्तेमाल किया जा सके। यह सम्मान केवल उन रिटायर्ड कर्मियों को मिलेगा, जिनके पास रिटायर्ड कर्मी वाला पहचान पत्र या पेंशनर आईकार्ड होगा। बीएसएफ ने इस योजना के लिए डाटा अपडेट करने का काम शुरू कर दिया है। इसमें सभी रिटायर्ड कर्मियों का डाटा अपडेट किया जाएगा। इसके अलावा बल के अधिकारी अब नियमित तौर पर शहीदों के परिजनों से मुलाकात करेंगे। अगर कोई वीरांगना है तो उससे संपर्क कर उसकी दिक्कत के बारे में पता लगाया जाएगा।
कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह का कहना है कि आजादी के बाद पहली बार ऐसा हो रहा है कि सरहदी चौकीदारों के मरणोपरांत उन्हें सलामी देकर अंतिम विदाई दी जाएगी। जरूरतमंद कर्मियों के परिवारों को बल की तरफ से आठ हजार रुपये की वित्तीय सहायता राशि भी मिलेगी। बीएसएफ का जवान अपनी सारी जिंदगी बॉर्डर पर देश सेवा करने में लगा देता है। अगर आखिरी वक्त पर उन्हें इस तरह का सम्मान एवं सलामी मिलती है तो इससे बड़ा तिरंगे का सम्मान भला और क्या हो सकता है। उनके लिए यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उम्मीद है कि बाकि सुरक्षा बलों के डायरेक्टर जनरल भी इस तरह का सम्मान देने का आदेश जारी करेंगे।