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घुलता जहरः मुश्किल...कीटनाशकों पर रोक की लड़ाई सात वर्ष से कानूनी दांवपेच में उलझी   

मनीष मिश्र, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Thu, 13 Aug 2020 09:06 AM IST

सार

  • 20% किसान लेते हैं कीटनाशक की आधिकारिक सूचना
  • 80 % के जानकारी लेने के स्रोत अविश्वसनीय होते हैं
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Pesticide use - फोटो : पीटीआई

हरित क्रांति से कृषि में समृद्धि तो आई पर इसने उल्टा असर भी डाला। खेती-किसानी में बढ़ते कीटनाशकों व जहरीले रसायनों के प्रयोग से मनुष्यों, पर्यावरण, पशु सभी पर असर दिख रहा। समय-समय पर सरकार इन कीटनाशकों की जांच कर इनसे होने वाले नुकसान को देख प्रतिबंधित भी करती है। हाल में सरकार ने 27 कीटनाशकों को रोक के लिए अधिसूचित किया है। इसके खिलाफ पेस्टीसाइड लॉबी कोर्ट चली गई। अब लड़ाई कानूनी दांवपेच में उलझ गई है।

फसलों में लगातार उड़ेले जा रहे 27 जहरीले रसायनों के रोक के लिए केंद्र सरकार ने 18 मई को अधिसूचना जारी कर इस पर राय मांगी थी, लेकिन इसके खिलाफ पेस्टीसाइड लॉबी अदालत चली गई।


जहां एक ओर सिविल सोसाइटी के लोग इससे होने वाले नुकसान के कारण तत्काल प्रतिबंध के लिए लामबंद हैं, वहीं हजारों करोड़ का हर वर्ष कारोबार करने वाली कीटनाशक कंपनियां प्रतिबंध से

खाद्य सुरक्षा खतरे में पड़ने का हवाला देकर इसे रुकवाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाए हैं। सरकार ने जिन 27 कीटनाशकों-खरपतवारनाशकों को प्रतिबंधित करने के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है इन्हें विदेशों में कहीं न कहीं पहले ही प्रतिबंधित किया जा चुका है।

कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग को रोकने के लिए काफी समय से लड़ाई लड़ रहीं चर्चित स्वयंसेवी संगठन आशा-किसान स्वराज नेटवर्क से जुड़ी कविता कुरुघंटी कहती हैं, पेस्टीसाइड लॉबी काफी प्रभावशाली है, प्रतिबंध की यह प्रक्रिया वर्ष 2013 में शुरू हुई थी, आज सात साल बाद भी बहस कर रहे हैं कि ये प्रतिबंधित होंगे कि नहीं। इस प्रक्रिया में काफी समय लगता है। पेस्टीसाइड इंडस्ट्री के हिसाब से ही सरकार के निर्णय चल रहे हैं। कविता आगे कहती हैं, 27 कीटनाशकों में से नौ तो ऐसे हैं कि जिनका रजिस्ट्रेशन तो है लेकिन सीमा निर्धारित नहीं है।

किसानों को नुकसान का अंदाजा नहीं 
किसान अनजाने में और डीलर कमीशन के लालच में अधिक से अधिक कीटनाशक और खरपतवार का उपयोग कर रहे हैं। सबसे बड़ी समस्या है कि किसानों को पता ही नहीं होता कि कौन सा कीटनाशक किस फसल के लिए कितना उपयोग करना होता है।
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किसान क्षेत्रीय दुकानदार की सलाह पर खरीदारी करता है। वहीं, कई सरकारी संस्थाओं से जुड़े वैज्ञानिक व कीटनाशक कंपनियां कहती हैं कि अगर किसान इन पेस्टीसाइड का तय सीमा में इस्तेमाल करे तो ये खतरनाक नहीं होते हैं। भारत में 20% किसान ही पेस्टीसाइड के उपयोग की जानकारी कृषि अधिकारियों से लेते हैं, 80% के स्रोत अविश्वसनीय होते हैं।

कीटनाशक डालने के तुरंत बाद न काटें फसल
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद में इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट से जुड़ीं डॉ. सुमिता अरोड़ा कहती हैं, हर कीटनाशक को डालने का समय होता है, उसके बाद तय समय तक प्रतीक्षा के बाद ही किसान को फसल काटनी चाहिए। फल व सब्जियों में डाला जाने वाला कीटनाशक ज्यादा खतरनाक होता है

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Pesticide use - फोटो : पीटीआई
हरित क्रांति से कृषि में समृद्धि तो आई पर इसने उल्टा असर भी डाला। खेती-किसानी में बढ़ते कीटनाशकों व जहरीले रसायनों के प्रयोग से मनुष्यों, पर्यावरण, पशु सभी पर असर दिख रहा। समय-समय पर सरकार इन कीटनाशकों की जांच कर इनसे होने वाले नुकसान को देख प्रतिबंधित भी करती है। हाल में सरकार ने 27 कीटनाशकों को रोक के लिए अधिसूचित किया है। इसके खिलाफ पेस्टीसाइड लॉबी कोर्ट चली गई। अब लड़ाई कानूनी दांवपेच में उलझ गई है।

फसलों में लगातार उड़ेले जा रहे 27 जहरीले रसायनों के रोक के लिए केंद्र सरकार ने 18 मई को अधिसूचना जारी कर इस पर राय मांगी थी, लेकिन इसके खिलाफ पेस्टीसाइड लॉबी अदालत चली गई।
जहां एक ओर सिविल सोसाइटी के लोग इससे होने वाले नुकसान के कारण तत्काल प्रतिबंध के लिए लामबंद हैं, वहीं हजारों करोड़ का हर वर्ष कारोबार करने वाली कीटनाशक कंपनियां प्रतिबंध से

खाद्य सुरक्षा खतरे में पड़ने का हवाला देकर इसे रुकवाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाए हैं। सरकार ने जिन 27 कीटनाशकों-खरपतवारनाशकों को प्रतिबंधित करने के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है इन्हें विदेशों में कहीं न कहीं पहले ही प्रतिबंधित किया जा चुका है।

कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग को रोकने के लिए काफी समय से लड़ाई लड़ रहीं चर्चित स्वयंसेवी संगठन आशा-किसान स्वराज नेटवर्क से जुड़ी कविता कुरुघंटी कहती हैं, पेस्टीसाइड लॉबी काफी प्रभावशाली है, प्रतिबंध की यह प्रक्रिया वर्ष 2013 में शुरू हुई थी, आज सात साल बाद भी बहस कर रहे हैं कि ये प्रतिबंधित होंगे कि नहीं। इस प्रक्रिया में काफी समय लगता है। पेस्टीसाइड इंडस्ट्री के हिसाब से ही सरकार के निर्णय चल रहे हैं। कविता आगे कहती हैं, 27 कीटनाशकों में से नौ तो ऐसे हैं कि जिनका रजिस्ट्रेशन तो है लेकिन सीमा निर्धारित नहीं है।

किसानों को नुकसान का अंदाजा नहीं 
किसान अनजाने में और डीलर कमीशन के लालच में अधिक से अधिक कीटनाशक और खरपतवार का उपयोग कर रहे हैं। सबसे बड़ी समस्या है कि किसानों को पता ही नहीं होता कि कौन सा कीटनाशक किस फसल के लिए कितना उपयोग करना होता है।

किसान क्षेत्रीय दुकानदार की सलाह पर खरीदारी करता है। वहीं, कई सरकारी संस्थाओं से जुड़े वैज्ञानिक व कीटनाशक कंपनियां कहती हैं कि अगर किसान इन पेस्टीसाइड का तय सीमा में इस्तेमाल करे तो ये खतरनाक नहीं होते हैं। भारत में 20% किसान ही पेस्टीसाइड के उपयोग की जानकारी कृषि अधिकारियों से लेते हैं, 80% के स्रोत अविश्वसनीय होते हैं।

कीटनाशक डालने के तुरंत बाद न काटें फसल
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद में इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट से जुड़ीं डॉ. सुमिता अरोड़ा कहती हैं, हर कीटनाशक को डालने का समय होता है, उसके बाद तय समय तक प्रतीक्षा के बाद ही किसान को फसल काटनी चाहिए। फल व सब्जियों में डाला जाने वाला कीटनाशक ज्यादा खतरनाक होता है

पश्चिमी उड़ीसा में बढ़े कैंसर के मामले, 200 की मौत

पश्चिमी उड़ीसा में खरपतवारनाशी पैराक्वेट के इस्तेमाल से किसानों की मौतों व उनमें पनपने वाली बीमारियों को करीब से देख रहे बुर्ला मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर एस रामचंदानी कहते हैं, कीटनाशकों के इस्तेमाल से ही उड़ीसा के बरगढ़ जिले में मुंह का कैंसर, स्तन कैंसर और गर्भाशय के कैंसर के मामले सबसे अधिक आ रहे हैं। 200 मरीजों की मौत हो चुकी है।

एसोसिएशन का दावा...कोई खराब असर नहीं
पेस्टीसाइड एसोसिएशन ऑफ इंडिया की रीजनल डिप्टी डायरेक्टर डॉ. अर्चना पाटिल कहती हैं, कुछ लोग चाहते हैं कि प्रतिबंधित लगे, लेकिन ये कीटनाशनक कितने सालों से उपयोग में हैं इनका ऐसा कोई साइड इफेक्ट नहीं देखा गया है।

इंडस्ट्री ने समय-समय पर डाटा भी दिया है, सरकार ने प्रतिबंधित करने के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है, जिसके खिलाफ हम लोग कोर्ट गए हैं।
भारत का चौथा स्थान : भारत में पेस्टीसाइड का बाजार करीब 20,000 करोड़ का है, जो वर्ष 2024 तक 31,600 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। अमेरिका, जापान और चीन के बाद कीटनाशक के कारोबार में भारत का चौथा स्थान है।

पीएम कर चुके हैं अपील...
पिछले साल 15 अगस्त को लालकिले से पीएम मोदी भी किसानों से धरती मां को जहरीले रसायनों से बचाने के लिए फसलों में कम से कम कीटनाशकों का उपयोग करने की अपील कर चुके हैं। सबसे अधिक कीटनाशकों की खपत महाराष्ट्र में होती है। इसके बाद यूपी व पंजाब का नंबर है।
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