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Pollution: बनारस में बहती है यूपी की सबसे अच्छी हवा, लेकिन देश में असम का शिवसागर सबसे साफ हवा वाला शहर

आशीष तिवारी
Updated Wed, 06 Dec 2023 02:02 PM IST

सार

केंद्रीय पर्यावरण वन और जलवायु मंत्रालय के राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम की रिपोर्ट से खुलासा। दिल्ली समेत नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और झारखंड के धनबाद की हवा सबसे जहरीली। हवाओं में पीएम 10 की सांद्रता औसतन खतरनाक स्तर से ज्यादा रही साल भर।
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Air Pollution - फोटो : अमर उजाला


फरीदाबाद, दिल्ली, धनबाद, नोएडा, गाजियाबाद में बह रही जहरीली हवा

केंद्रीय वन पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के आंकड़ों में सिर्फ देश के सबसे अच्छे शहरों की हवाओं का ही जिक्र नहीं है। बल्कि देश के टॉप फाइव सबसे ज्यादा जहरीली हवाओं वाले शहरों का भी जिक्र है। आंकड़ों के मुताबिक पांच सबसे ज्यादा जहरीली हवाओं वाले शहरों में चार शहर दिल्ली और एनसीआर के हिस्से में आते हैं। इसमें पहले नंबर पर हरियाणा के फरीदाबाद शहर का जिक्र है। रिपोर्ट के मुताबिक फरीदाबाद में पूरे साल हवा में पीएम10 की हवा में सांद्रता 212 रही। जबकि दूसरे नंबर पर यह आंकड़ा दिल्ली का रहा। दिल्ली में यही प्रतिशत साल भर का औसतन 209 दर्ज किया। जबकि तीसरे नंबर पर झारखंड के धनबाद शहर की हवा में पीएम10 के जहरीले कण साल भर घूमते रहे। औसतन यहां का आंकड़ा 203 का दर्ज किया। चौथे नंबर पर नोएडा और पांचवें नंबर पर गाजियाबाद की हवा में पीएम10 की सांद्रता खतरनाक स्तर पर बनी रही। रिपोर्ट में यहां आंकड़ा क्रमशः 202 और 198 बना रहा।


सबसे बेहतर हुई बनारस की हवा, दिल्ली में भी सुधरा है यह प्रतिशत

राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली की हवा में पीएम10 की सालना सांद्रता औसतन 209 दर्ज हुई। जबकि 2017 में यह प्रतिशत 241 माइक्रोग्राम घन मीटर था। दिल्ली में यह आंकड़ा पहले से बेहतर हुआ है। इसी तरह उत्तर प्रदेश की बनारस में बहने वाली हवाओं में पीएम 10 की सांद्रता की गुणवत्ता में जबरदस्त तरीके का सुधार हुआ है। आंकड़ों के मुताबिक 2017-18 के रिपोर्ट में बनारस की हवा में जहरीले कण 230 माइक्रोग्राम घन मीटर हुआ करते थे। जबकि 2022-23 के रिपोर्ट बताती है कि यहां तकरीबन 60 फ़ीसदी का लक्ष्य तय करते हुए अब औसतन पीएम10 की सांद्रता का सालाना स्तर 94 पर पहुंच गया। उत्तर प्रदेश के 17 शहरों में वायु गुणवत्ता के आंकड़ों में मेरठ और झांसी शहर में जहरीले कणों की कमी के बजाय बढ़ोतरी दर्ज हुई है। जबकि 15 अन्य शहरों में बेहतर सुधार हुआ है। 


आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में सबसे जहरीली हवा नोएडा और उसके बाद गाजियाबाद की दर्ज हुई। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की हवा में पीएम10 की सांद्रता में 40 फ़ीसदी से ज्यादा का बेहतर सुधार हुआ। आंकड़ों के मुताबिक 2017-18 में जो स्तर 253 का था वह अब 149 पर सिमट गया है। इसी तरह कानपुर में भी बेहतर सुधार हुआ है। पहले जो आंकड़ा 227 था वह अब 143 हो गया है। आंकड़ों के मुताबिक आगरा में 118, इलाहाबाद में 125, बरेली में 110 फिरोजाबाद में 106, गोरखपुर में 102,  मुरादाबाद में 116 और रायबरेली की हवा में पीएम10 की सांद्रता 102 माइक्रोग्राम घन मीटर दर्ज की गई। आंकड़े तस्दीक करते हैं कि उत्तर प्रदेश के सभी चुने गए 17 शहरों में सिर्फ मेरठ और झांसी को छोड़कर एयर क्वालिटी में बेहतर सुधार हुआ है। इसमें सबसे ज्यादा बनारस, उसके बाद फिरोजाबाद और तीसरे नंबर पर मुरादाबाद चौथे नंबर पर बरेली पांचवें नंबर पर आगरा की हवा में सुधरी।


असम, तमिलनाडु और हिमाचल के शहर 'टॉप फाइव' में

देश के शहरों में स्वच्छ हवा का आकलन कर उसमें सुधार लाने के लिए राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम की शुरुआत की गई। पर्यावरण एवं मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक देश के अलग-अलग राज्यों के मुताबिक 131 शहरों का चयन किया गया। इस रिपोर्ट के मुताबिक पूरे देश में साल भर औसतन सबसे अच्छी हवा असम के शिवसागर की आंकी गई। रिपोर्ट के मुताबिक इस शहर हवा में जहरीले कणों वाले पीएम10 की सांद्रता महज 42 ही पाई गई। जबकि दूसरे नंबर पर हिमाचल प्रदेश के सुंदर नगर की हवा देश में स्वच्छ (46) रही। पूरे देश में तीसरे नंबर पर हिमाचल प्रदेश के परवाणू और तमिलनाडु के त्रिची में हवा की गुणवत्ता साल भर अच्छी रही। यहां औसतन पीएम10 की सांद्रता 47 माइक्रोग्राम घनमीटर रिकॉर्ड की गई। जबकि पूरे देश में चौथे नंबर पर असम के ही एक और शहर सिलचर की हवा में पीएम10 की सांद्रता 49 पाई गई। जबकि देश में पांचवें नंबर पर सबसे अच्छी हवा महाराष्ट्र के लातूर की रही। केंद्रीय मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक यहां की हवा में पीएम10 की मात्रा साल भर में औसतन 53 माइक्रोग्राम घनमीटर से ज्यादा नहीं रही। 


लक्ष्य पाने की बजाय बिछड़ते गए मध्य प्रदेश और बिहार के शहर

केंद्रीय वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक राष्ट्रीय वायु स्वच्छता कार्यक्रम के तहत मध्य प्रदेश के सात शहर चुने गए थे। इसमें भोपाल, देवास, ग्वालियर, इंदौर, जबलपुर, सागर और उज्जैन शामिल थे। आंकड़ों के मुताबिक इन सातों शहरों में 2017-18 के आंकड़ों की तुलना में 2022-23 में हवा में पीएम 10 की सांद्रता सुधरने की बजाय बढ़ती चली गई। आंकड़े बताते हैं कि भोपाल 10 फ़ीसदी की बढ़ोतरी के साथ 124 पर पहुंच गया। जबकि 5 साल पहले यह 112 पर थी। इसी तरह देवास में पीएम10 की सांद्रता का स्तर 105 पाया गया। जबकि 5 साल पहले 83 था। ग्वालियर में तो हवा में पीएम 10 की सांद्रता 145 पाई गई जबकि 2017-18 में यही फिगर 126 की थी। इंदौर में 109, जबलपुर में 125, सागर में 83 और उज्जैन में सांद्रता 111 पाई गई। 5 साल पहले इंदौर में यही आंकड़ा 82, जबलपुर में 101, सागर में 73 और उज्जैन में 93 था। हालांकि आंकड़ों के मुताबिक पूरे मध्य प्रदेश में सबसे अच्छी हवा अभी भी सागर और उज्जैन की ही है। इसी तरह बिहार के पटना की हवा में पीएम10 की सांद्रता 193 पाई गई, जो की 2017-18 की तुलना में तकरीबन 13 फीसदी ज्यादा है। गया में यह आंकड़ा 150 हो गया जो 5 साल पहले की तुलना में तकरीबन पचास फ़ीसदी ज़्यादा बढ़ गया। इसी तरह मुजफ्फरपुर में भी यह आंकड़ा 175 पर रहा। जो कि बीते 5 वर्षों में 20 फ़ीसदी बढ़ा।


दक्षिण भारत में बहती है सबसे साफ हवा

आंकड़े तस्दीक करते हैं कि उत्तर भारत से बेहतर दक्षिण भारत के शहरों की स्वच्छ और सबसे कम जहरीली हवाएं हैं। बेंगलुरु की हवाओं में पीएम10 की सांद्रता का प्रतिशत 68 माइक्रो घन मीटर है। जबकि कर्नाटक के ही दावणघेरे में या प्रतिशत 61 है। कर्नाटक के गुलबर्गा में 74 तो यही के धारवाड़ हुबली में यह आंकड़ा 76 है। इसी तरह तमिलनाडु की चेन्नई में 66 तो मदुरई में 68, त्रिचि में 47 और तूतीकोरीन में यह आंकड़ा 54 है। तेलंगाना के हैदराबाद की हवा में पीएम10 की सांद्रता 83 है तो नालगोंडा में या 55 है। इसी तरह आंध्र प्रदेश के अनंतपुर में 57 चित्तूर में 52 अंगोल में 51 और कडपा में यह आंकड़ा 57 है। केंद्रीय मंत्रालय की इस रिपोर्ट के मुताबिक अहमदाबाद की हवा में पीएम10 की सांद्रता महज 91 ही है। इसी तरह चंडीगढ़ में जहरीले कणों की सांद्रता का आंकड़ा116 है। हालांकि बीते 5 साल पहले चंडीगढ़ की हवाओं में यह आंकड़ा 114 हुआ करता था। 
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पहाड़ी इलाकों और नॉर्थ ईस्ट में कुछ ऐसा है हवा का हाल

केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की रिपोर्ट बताती है कि सिर्फ मैदानी ही नहीं बल्कि पहाड़ी इलाकों में भी वायु की गुणवत्ता कहीं बेहतर तो कहीं बदहाल स्तर पर है। आंकड़ों के मुताबिक हिमाचल प्रदेश के पावटासाहिब और इंडस्ट्रियल एरिया बद्दी में पीएम10 की हवा में सांद्रता क्रमशः 103 और 145 दर्ज हुई है। पावटासाहिब में 2017 की रिपोर्ट की तुलना में हवा में 22 फ़ीसदी जहरीले कणों की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। जम्मू में पीएम10 की औसत सांद्रता 158 दर्ज की गई। हालांकि श्रीनगर में यह बेहतर सुधार के साथ 88 पर पहुंच गई। इसी तरह नॉर्थ ईस्ट के राज्यों में मेघालय के बर्निहट में 131, नागालैंड के दीमापुर में 91 और कोहिमा में यह आंकड़ा 72 दर्ज किया गया। जबकि उत्तराखंड के देहरादून में 117, काशीपुर में 112 और ऋषिकेश में सालाना औसतन 103 दर्ज हुआ।


केंद्रीय पर्यावरण वन और जलवायु मंत्रालय के मुताबिक वायु प्रदूषण का आकलन कर उसके खतरनाक स्तर को कम करने के लिए राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम की शुरुआत की गई। मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि इसके तहत 131 शहरों का चयन किया गया। अधिकारियों के मुताबिक इस कार्यक्रम के अंतर्गत जिन शहरों में वायु की गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर है उसको काम करने की योजनाएं बनाई गई। योजना के मुताबिक साल में 20 से 30% तक हवाओं में पीएम10 की सांद्रता को कम करने का लक्ष्य रखा गया। वायु गुणवत्ता में सुधार लाने वाले इस कार्यक्रम से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं की 2025-26 तक इन जहरीले कणों की हवाओं में सांद्रता औसतन 40 फ़ीसदी तक काम करने लक्ष्य रखा गया है। आंकड़े बताते हैं कि बीते 5 सालों में देश के अलग-अलग राज्यों में यह लक्ष्य पूरा भी हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सामान्य दशा में पीएम10 का स्तर 100 माइक्रो घन मीटर होना चाहिए। जबकि दुनिया के बेहतर एयर क्वालिटी इंडेक्स वाले शहरों मे या आंकड़ा 50 से 60 के बीच में ही दर्ज होता है।
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