श्रीनगर से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर ठाकुरपाड़ा इलाके में सपना चौधरी का संयुक्त परिवार रहता है। यहीं उनकी दुकान और मकान हैं। सपना और उनके परिवार के बाकी लोग मंगलवार को हुए तनाव के बाद डर के माहौल में अपने रिश्तेदारों के घर चले गए थे। अगले दिन बुधवार को उनके मकान और दुकान को जला दिया गया। वो इस संवाददाता को अपने घर ले गईं। बरामदे में खड़ी मोटरसाइकिल दंगाइयों ने जला दी थी।
अंदर अलमारियों से सामान लूट लिया गया था और जो दंगाई अपने साथ नहीं ले जा पाए उसमें आग लगा दी। अब उनके घर में हर जगह राख और धुएं के निशान ही दिखते हैं। उनकी चाची अपने जले हुए घर में बैठी सुबक रही थीं। इस संवाददाता को देखकर रोते हुए बोलीं, "मेरा घर लूट लिया। दुकान लूट ली। घर में जवान बहू-बेटी हैं। उनकी जान बचाने के लिए हम मंगल की रात को ही यहां से निकल गए थे। अगले दिन हमारा घर फूंक दिया गया।"
सपना चौधरी बताती हैं, "बुधवार दोपहर हमारे घर और दुकान में लूटपाट की गई। उसके बाद शाम को आग लगा दी गई। हमें बुधवार रात पता चला कि हमारा घर जला दिया गया है।" सपना सवाल करती हैं, "तनाव हो जाने के बाद भारी पुलिस बल तैनात किए गए थे। पुलिस खड़ी थी और हमारा घर जल रहा था। पुलिस सिर्फ तमाशा देख रही थी। मैं सरकार से बस यही सवाल पूछना चाहती हूं कि इतनी भारी तादाद में पुलिस थी तब भी हमारा घर कैसे जला दिया गया?" ठाकुरपाड़ा मुस्लिम बहुल मोहल्ला है जहां दस-बारह हिंदू परिवार रहते हैं। शहर में तनाव की खबरों के बाद यहां रहने वाले
हिंदू परिवार अपने घर छोड़कर चले गए थे।
चार दिन बाद अपने घर लौटी अजमुन्निशा कहती हैं, "हमने जुलूस का पूरे दिल से इस्तकबाल किया और उसे विदा किया। यहां सबकुछ ठीक था। आगे कहीं कुछ हुआ होगा और फिर बवाल यहां तक पहुंच गया।" वो कहती हैं, "हम लोग पांच दिन से घर से बेघर थे। भूखे-प्यासे। किसी ने हाल तक नहीं पूछा। कोई देखने नहीं आया।" मोहम्मद इस्लाम इस साल रामनवमी के जुलूस में शामिल थे, वो कहते हैं, "हम लोग जुलूस के साथ-साथ थे। यहां से जुलूस अच्छे से निकाला था, कहां क्या हुआ ये हमें नहीं मालूम है, मगर चार सौ घर यहां बर्बाद हो गए।"
मंगलवार को रामनवमी के जुलूस पर पथराव के बाद आसनसोल में कई तरह की अफवाहें फैली और डर और अविश्वास का माहौल बना। इसी माहौल में मिश्रित आबादी में रहने वाले हिंदू-मुस्लिम परिवार अपने घर छोड़ गए थे। इस्लाम कहते हैं, "अगले दिन बुधवार को सुबह करीब साढ़े दस बजे अचानक भीड़ आई और मुसलमानों के घरों को निशाना बनाकर गोलियां चलानी शुरू कर दी। ये लोग कौन थे हम नहीं जानते, लेकिन हमारे पड़ोसी तो नहीं थे।"
यहीं रहने वाली एक
मुस्लिम महिला ने कहा, "वो लोग गोली चला रहे थे। हम पत्थर भी न चलाएं। ऐसे ही मर जाएं। हमें भी अपने जीवन की रक्षा का हक है।" बीपीएल कॉलोनी के मुसलमान परिवारों के घर खत्म होते ही पहली बिल्डिंग में सीता देवी का घर है। वो भी तनाव के माहौल में घर छोड़कर चली गईं थीं और रविवार को ही लौटी हैं। सीता देवी कहती हैं, "हमारे पास रहने वाले मुसलमान अपने घरों से चले गए तो हम लोग भी चले गए। जवान बेटियां साथ हैं, इतने डर के माहौल में हम यहां कैसे रहते।"
सीता देवी की बेटी कुसुम दो दिन राहत कैंप में रहने के बाद घर लौट आई हैं। वो कहती हैं, "दंगे में नुकसान एक तरफ का नहीं होता है, दोनों तरफ का होता है, डर सबको बराबर लगता है। पता नहीं ये सब क्यों हो रहा है।" इस बीपीएल कॉलोनी में अभी तक हिंदू और मुसलमान आपस में मिल जुलकर रहते आ रहे थे। लेकिन बीते सालों में देश में बढ़ी सांप्रदायिकता यहां तक भी पहुंच गई है और कभी एक दूसरे के साथ रहने वाले ये लोग अब एक दूसरे को डर और शक की निगाह से देखते हैं।
सीता देवी की एक पड़ोसन मालती देवी कहती हैं, "हम लोग सात-आठ सालों से एक साथ रह रहे हैं। एक-दूसरे का हालचाल पूछते हैं, जरूरत पड़ने पर पानी लेते-देते हैं। पता नहीं ये सब कैसे हो गया?" वो बार-बार जोर देकर ये कहती हैं कि ये दंगा बाहर के लोगों ने भड़काया है। यही बात यहां के मुसलमान भी कहते हैं। ये बाहर के लोग कौन हैं किसी को नहीं पता। जब मैंने इस्लाम से पूछा कि क्या वो गोली चलाने वालों को पहचानते हैं तो उन्होंने भी यही कहा, ''वो लोग बाहर से आए थे।'' यहां बात करने पर हर कोई ये कहता है कि दंगा बुरा होता है और दंगाई बाहर से आए थे। ये बाहर के लोग कौन थे ये पता करना सरकार की जिम्मेदारी है।
यहीं के एक स्थानीय मुस्लिम युवा ने इस संवाददाता को बताया कि दंगाइयों की भीड़ ने चुनकर इस परिवार के घर को निशाना बनाया। उस युवा ने कहा, "इनकी गल्ले की दुकान के बगल में ही हिंदुओं की चार-पांच दुकानें हैं, किसी और को निशाना नहीं बनाया गया। सोने की दुकान भी है उसे भी नहीं लूटा गया। भीड़ ने सिर्फ इस परिवार को निशाना बनाया।" और कुरेदने पर वो कहते हैं, "दरअसल इस परिवार के युवाओं ने गोलीबारी की थी। जब ये लोग यहां से चले गए तो भीड़ ने इनका घर लूट लिया।" हालांकि सपना और उनके परिवार के लोग इस तरह के सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हैं। उन्हें अफसोस है कि कोई भी पड़ोसी उनके घर को बचाने नहीं आया।
दूसरी ओर श्रीनगर मोहल्ले में अपने घर छोड़कर गए हिंदू और मुसलमान परिवार अब लौटने लगे हैं। यहां रहने वाली जैनब जमा के घर को निशाना बनाकर चलाई गई गोली रसोई में लगी लोहे की खिड़की में छेद करके निकल गई। वो कहती हैं, ''सीधे हमारे घर पर गोली चलाई गई। किस्मत अच्छी है कि गोली किसी को लगी नहीं।'' श्रीनगर कॉलोनी में बीते साल भी रामनवमी के जुलूस को लेकर तनाव हुआ था। इसलिए इस साल पूरा एहतियात बरता गया था कि सब कुछ ठीक से हो जाए।