देश में एक ऐसा मंदिर बनकर तैयार हुआ है, जो न सिर्फ अपने में अनोखा है, बल्कि दुनिया में पहली बार कृष्ण शिलाओं से बना कर इस मंदिर की भव्यता दी गई है। 2000 करोड़ रुपये से बनाकर तैयार किए गए इस अनोखे 1000 साल पुराने मंदिर को तेलंगाना के यादाद्रिभुवनगिरी जिले में बनाया गया है। यदाद्रि मंदिर के नाम से मशहूर दुनिया का इकलौता कृष्ण शिलाओं से बना यह मंदिर श्री लक्ष्मी नरसिम्हा का मंदिर है। तेलंगाना सरकार के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की पहल पर बनाए गए इस मंदिर में हैदराबाद के आठवें निजाम की पत्नी ने अपने स्वर्ण आभूषणों को दान किया। तेलंगाना सरकार के मुताबिक इस मंदिर की भव्यता और वास्तुकला ही इस मंदिर सबसे अनूठा बनाती है। मंदिर में रोजाना तकरीबन एक लाख दर्शनार्थी दर्शन करने पहुंच रहे हैं।
देश में एक ऐसा मंदिर बनकर तैयार हुआ है, जो न सिर्फ अपने में अनोखा है, बल्कि दुनिया में पहली बार कृष्ण शिलाओं से बना कर इस मंदिर की भव्यता दी गई है। 2000 करोड़ रुपये से बनाकर तैयार किए गए इस अनोखे 1000 साल पुराने मंदिर को तेलंगाना के यादाद्रिभुवनगिरी जिले में बनाया गया है। यदाद्रि मंदिर के नाम से मशहूर दुनिया का इकलौता कृष्ण शिलाओं से बना यह मंदिर श्री लक्ष्मी नरसिम्हा का मंदिर है। तेलंगाना सरकार के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की पहल पर बनाए गए इस मंदिर में हैदराबाद के आठवें निजाम की पत्नी ने अपने स्वर्ण आभूषणों को दान किया। तेलंगाना सरकार के मुताबिक इस मंदिर की भव्यता और वास्तुकला ही इस मंदिर सबसे अनूठा बनाती है। मंदिर में रोजाना तकरीबन एक लाख दर्शनार्थी दर्शन करने पहुंच रहे हैं।
तेलंगाना सरकार से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि जब तेलंगाना राज्य बनाया गया तो यहां के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने 1000 साल पुराने यादागिरीगुट्टा के यदाद्रि मंदिर के पुनरुद्धार की योजना बनाई। मंदिर के ट्रस्ट से जुड़े यानिगरी राव कहते हैं कि इस मंदिर की भव्यता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस मंदिर के निर्माण में करीब तीन लाख टन कृष्ण शिलाओं (काले पत्थरों) का इस्तेमाल किया गया है। यह पूरा पत्थर आंध्र प्रदेश के प्रकाशम और गुंटूर जिले से मंगवाया गया है। उनका कहना है कि इस मंदिर को बनाने के लिए करीमनगर और तमिलनाडु सहित दक्षिण भारत के अलग-अलग स्थानों से 800 शिल्पकारों को बुलाया गया। खास बात यह थी कि इस मंदिर को बनाने में तेलंगाना की वास्तुकला और संस्कृति विरासत की झलक के साथ मंदिर की भव्यता और अखंडता भी झलक दिखनी थी। मंदिर को बनाने के लिए डेढ़ हजार श्रमिकों ने पांच साल तक दिन रात मेहनत की।
मंदिर की भव्यता और बढ़े इसके लिए तकरीबन 40 किलो सोने से मंदिरों के गुंबद का निर्माण किया गया है। जबकि मंदिर में अभी देश और दुनिया के अलग-अलग दानदाताओं की ओर से सोने का चढ़ावा दिया जाता है। इस मंदिर के भव्य निर्माण में हैदराबाद के आठवें निजाम की पत्नी ने भी अपने स्वर्ण आभूषणों को दान किया। इसके अलावा तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने एक किलो से ज्यादा सोने को दान कर देश के लोगों से भी मंदिर में बढ़-चढ़कर स्वर्ण दान करने की अपील की। मंदिर में सोने के अलावा तकरीबन अट्ठारह सौ टन चांदी की शिल्पकारी से मंदिर की भव्यता तैयार हुई है।
नौ पहाड़ियों को जोड़कर बना है मंदिर
इस मंदिर के मुख्य वास्तुकार आनंद साई हैं। यादाद्रि मंदिर विकास प्राधिकरण से जुड़े लक्ष्मण रेड्डी कहते हैं कि यह मंदिर परिसर 2000 एकड़ में बनकर तैयार हुआ है। इस इलाके की नौ पहाड़ियों को जोड़कर के पूरे मंदिर का विकास किया गया है। विकास प्राधिकरण से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि दो पहाड़ियों पर बने मंदिर के सामने की सात पहाड़ियों का जो नजारा दिखता है, वह देश के सबसे अनोखे मंदिर होने की पुष्टि भी करता है। तीन मंजिला बने इस मंदिर की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मंदिर के प्रवेश द्वार पर तेरह हजार टन वजन का पत्थर रखकर उसे तैयार किया गया है।
तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद से तकरीबन 70 किलोमीटर दूर इस मंदिर का शुभारंभ पिछले साल मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने किया था। मंदिर की देखरेख करने वाली समिति से जुड़े लोगों का कहना है कि इस वक्त मंदिर में औसतन एक लाख दर्शनार्थी रोज दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं। तेलंगाना में बने इस भव्य मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यह तेलंगाना के अपने तिरुपति का मंदिर है। तेलंगाना की पूर्व राज्यसभा सांसद और वर्तमान विधायक के कविता कहती हैं कि इस मंदिर से तेलंगाना राज्य की अपनी एक विशिष्ट पहचान बनी है। उनका मानना है कि आने वाले दिनों में इस मंदिर की भव्यता सिर्फ तेलंगाना और देश ही नहीं बल्कि दुनिया में सबसे अनोखी होगी। तेलंगाना सरकार ने इस पूरे मंदिर परिसर के आसपास की हजारों एकड़ जमीन को विकास प्राधिकरण के तौर पर विकसित करने की योजना बनाई है। मंदिर परिसर के आसपास हवाई अड्डे के निर्माण की योजना बन रही है, ताकि दुनिया के अलग-अलग कोनों से आने वाले दर्शनार्थियों को सीधा मंदिर परिसर में ही पहुंचना आसान हो सके।