आईएएस छवि रंजन
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार को झारखंड में बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने आईएएस छवि रंजन को गिरफ्तार कर लिया। उन पर रांची में अवैध रूप से जमीन हड़पने और बेचने का आरोप है। इससे पहले, 13 और 24 अप्रैल को छवि रंजन कथित अवैध जमीन सौदा मामले में पूछताछ के लिए रांची में ईडी के समक्ष पेश हुए थे। यहां उनसे कई घंटे तक सवाल पूछे गए थे।
आईएएस छवि रंजन
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जिस केस में आईएएस छवि रंजन गिरफ्तार हुए वह मामला क्या है?
आईएएस छवि रंजन के खिलाफ ईडी की यह कार्रवाई धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत की गई। दरअसल, एजेंसी रक्षा जमीन से संबंधित एक भूखंड समेत 12 से अधिक जमीन सौदों के मामले में जांच कर रही है।
आरोप है कि एक सिंडिकेट जिसमें भू माफिया, बिचौलिए और नौकरशाह शामिल हैं, साठगांठ कर कथित तौर पर जमीन के कामों और दस्तावेजों के फर्जीवाड़े में शामिल है। सिंडिकेट ने रांची में 4.5 एकड़ रक्षा भूमि को हड़पने के लिए कुछ जाली दस्तावेज बनाए थे। बाद में इसने उसी जमीन को फर्जी तरीके से पश्चिम बंगाल की एक कंपनी को बेच दिया।
इस मामले में एक पुलिस प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसका पीएमएलए के तहत ईडी ने संज्ञान लिया। गुरुवार को हुई छवि रंजन की गिरफ्तारी इसी जांच की कड़ी है।
झारखंड आईएएस छवि रंजन के घर ईडी की छापेमारी
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पहले भी कोई कार्रवाई हुई थी?
अवैध भूमि बिक्री जांच के सिलसिले में छवि रंजन को पहले 13 अप्रैल और दूसरी बार 24 अप्रैल को पूछताछ के लिए तलब किया गया था। इस दौरान ईडी ने उनसे कई घंटों की पूछताछ की। इससे पहले, 13 अप्रैल को ही आईएएस छवि रंजन के रांची स्थित दो व जमशेदपुर स्थित एक ठिकाने सहित कुल 22 ठिकानों पर ईडी ने छापा मारा था।
इस दौरान ईडी को बड़गाईं अंचल कार्यालय के राजस्व उप निरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद के आवास से सरकारी फाइलें व सैकड़ों जमीन के डीड मिले थे। एजेंसी ने तलाशी के दौरान कई फर्जी मुहरें, जमीन के कागजात और रजिस्ट्री दस्तावेज भी बरामद किए।
आईएएस छवि रंजन
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छवि रंजन पर क्या आरोप हैं?
ईडी ने छवि से पहले, इस मामले में झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल में छापेमारी के बाद एक सरकारी अधिकारी समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान अफशर अली, इम्तियाज अहमद, प्रदीप बागची, मोहम्मद सद्दाम हुसैन, तल्हा खान, भानु प्रताप प्रसाद और फैयाज खान के रूप में की गई थी।
जानकारी के मुताबिक, भानु प्रताप प्रसाद और अफसर अली झारखंड सरकार के कर्मचारी हैं। बाकी लोगों को बिचौलिया माना जाता है जो जमीन की खरीद-बिक्री का काम करते थे।
ईडी का दावा है कि वे धोखाधड़ी से बिक्री करने के लिए कई फर्जी दस्तावेज बनाने के काम में शामिल थे। छवि रंजन 15 जुलाई, 2020 से 11 जुलाई, 2022 के बीच रांची के उपायुक्त (डीसी) थे, जब कथित तौर पर भूमि सौदे हुए थे। आरोप के मुताबिक, रांची में डीसी रहते छवि रंजन ने आदिवासी क्षेत्र के कई भूखंडों की प्रकृति में बड़े पैमाने पर बदलाव कराया था। छवि रंजन झारखंड सरकार के समाज विभाग कल्याण में निदेशक हैं।
जांच में क्या निकला?
ईडी की मानें तो रक्षा भूमि मूल रूप से बीएम लक्ष्मण राव नामक व्यक्ति की थी, जिन्होंने आजादी के बाद इसे सेना को सौंप दिया था। सिंडिकेट ने फर्जी दस्तावेज बनाए और गिरफ्तार किए गए प्रदीप बागची को फर्जी मालिक बना दिया। प्रदीप बागची ने 4.55 एकड़ जमीन का असली मालिक होने का दावा किया था। उन्होंने यह दिखाने के लिए दस्तावेज भी पेश किए कि 1932 में उनके परिवार ने जमीन खरीदी थी और रजिस्ट्री कोलकाता भूमि रजिस्ट्री कार्यालय में की गई थी। इस प्रक्रिया में छवि रंजन ने भी भूमिका निभाई।
रजिस्ट्री के बाद जमीन को पश्चिम बंगाल की एक कंपनी जगतबंधु टी एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड को बेच दिया गया। जब उक्त जमीन का सर्किल रेट 20.75 करोड़ रुपये था, तब भी इसे 7 करोड़ रुपये की बेहद कम कीमत पर बेचा गया था। इसमें से 25 लाख रुपये बागची को दिए गए थे और बाकी की राशि 2021 में टी एस्टेट के नाम पर चेक के माध्यम से फर्जी भुगतान दिखाया गया।
राज्य और जिले तक बदले गए
दिलचस्प बात यह है कि दस्तावेजों में राज्य का उल्लेख पश्चिम बंगाल के रूप में किया गया है, जबकि 1932 में यह सिर्फ बंगाल प्रांत (एकीकृत बंगाल) था। 1947 में इसका नाम बदलकर पश्चिम बंगाल कर दिया गया। इसी प्रकार दस्तावेज में कई स्थानों पर गवाहों, विक्रेता और खरीददार के पते के साथ पोस्टल इंडेक्स नंबर कोड (पिन) का उल्लेख किया गया, जबकि पिन कोड की शुरुआत 1972 में की गई। यहां तक की भोजपुर जिले को विक्रय का पैतृक जिला बताया गया है, जबकि भोजपुर 1972 में अस्तित्व में आया।
भूमि रजिस्टरों की हुई फॉरेंसिक जांच
जांच के दौरान ईडी ने ऐसे सभी दस्तावेजों के साथ-साथ कोलकाता रजिस्ट्रार कार्यालय के भूमि रजिस्टरों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा था। इसके मुताबिक, पूरे नेक्सस ने फर्जी दस्तावेज बनाकर काफी जमीन बेची है। यहां तक कि असली मालिक भी इस बात से अनजान हैं कि उनकी जमीनें बिक चुकी हैं।