तेलंगाना में के. चंद्रशेखर राव के नेतृत्व में बीआरएस की सरकार है तो मिजोरम में जोरमथंगा के नेतृत्व वाली मिजो नेशनल फ्रंट सत्ता में है। वहीं पूर्वोत्तर राज्य में मिजोरम में मिजो नेशनल फ्रंट की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी, जिसके मुखिया जोरमथंगा बने।
तेलंगाना और मिजोरम में विधानसभा चुनाव की तारीखों का एलान हो गया है। चुनाव आयोग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी जानकारी दी। बताया गया कि मिजोरम में सात नवंबर तो तेलंगाना में 30 नवंबर को मतदान होगा। वहीं, चुनाव के नतीजे तीन दिसंबर को आ जाएंगे।
विज्ञापन
बता दें, तेलंगाना में 35 हजार से अधिक मतदान केंद्र हैं। वहीं मिजोरम में 1,276 मतदान केंद्र हैं। अगर कुल मतदाताओं की बात करें तो तेलंगाना में 3.17 करोड़ और मिजोरम में 8.52 लाख हैं।
गौरतलब है, तेलंगाना में के. चंद्रशेखर राव के नेतृत्व में भारत राष्ट्रीय समिति (बीआरएस) की सरकार है तो मिजोरम में जोरमथंगा के नेतृत्व वाली मिजो नेशनल फ्रंट सत्ता में है। 2018 में आए चुनाव नतीजों के बाद तेलंगाना में तत्कालीन तेलंगाना राष्ट्रीय समिति (टीआरएस) ने सरकार बनाई। के. चंद्रशेखर राव राज्य के मुख्यमंत्री बने। वहीं पूर्वोत्तर राज्य में मिजोरम में मिजो नेशनल फ्रंट की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी, जिसके मुखिया जोरमथंगा बने।
विज्ञापन
अभी क्या है विधानसभा की स्थिति?
2018 के चुनाव के बाद 119 सदस्यीय विधानसभा में बीआरएस की 88, कांग्रेस की 19, आईएमआईएम की सात, टीडीपी की दो, भाजपा की एक, एआईएफबी की एक सीट थी। इसके अलावा एक सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी को जीत मिली थी। पिछले विधानसभा चुनाव के बाद हुए चार उपचुनावों में से तीन पर सत्ताधारी बीआरएस ने जीत दर्ज की। पहले इनमें से तीन सीटें उसके पास थी जबकि बीआरएस ने एक सीट कांग्रेस ने छीन ली। वहीं, एक सीट भाजपा ने बीआरएस की कब्जाई। इसके अलावा कांग्रेस के 12 विधायकों के बीआरएस में शामिल होने से पार्टी के विधायकों की संख्या बढ़ गई है। इस वक्त 119 सदस्यीय विधानसभा में बीआरएस के 101, एआईएमआईएम के सात, कांग्रेस के पांच और भाजपा के तीन विधायक हैं। दो सीट पर निर्दलीय विधायक हैं, जबकि एक सीट अभी खाली है।