पिछले हफ्ते की शुरुआत में तमिलनाडु के सीएम स्टालिन ने कर्नाटक से अपर्याप्त कावेरी जल के कारण कुरुवई (धान) की खेती से पीड़ित डेल्टा किसानों को 13,500 रुपये प्रति हेक्टेयर का मुआवजा देने का वादा किया था।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने आज विधानसभा में राज्य सरकार की ओर से कर्नाटक सरकार को कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के आदेशों के अनुसार कावेरी जल छोड़ने का निर्देश देने के लिए एक प्रस्ताव पेश किया।
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उन्होंने इस प्रस्ताव को पेश करते हुए कहा, 'कावेरी डेल्टा के किसानों की आजीविका की रक्षा के लिए, जो तमिलनाडु की कृषि का आधार हैं। इस अगस्त सदन ने सर्वसम्मति से केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह कर्नाटक सरकार को कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के निर्देशों के अनुसार तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ने का निर्देश दे।'
डिप्टी सीएम का बयान
कर्नाटक सरकार ने अपने कुछ क्षेत्रों में सूखे का हवाला देते हुए तमिलनाडु को पानी की आपूर्ति से इनकार कर दिया था। इस पर कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने कहा, 'हमें 106 हजार मिलियन क्यूबिक फीट (टीएमसी) पानी की जरूरत है, लेकिन कम बारिश होने के कारण हमारे पास वर्तमान में 25 क्यूसेक पानी ही है।'
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उन्होंने आगे कहा, 'हमें खड़ी फसलों को बचाना है। हमने कृषि विभाग से अगली खेती की अनुमति न देने पर विचार करने के लिए भी कहा है। हम अधिक बारिश की उम्मीद कर रहे हैं। यह एक संकटपूर्ण वर्ष है।'
डेल्टा किसानों को मिलेगा मुआवजा
दोनों राज्यों के किसान कावेरी जल विवाद पर प्रदर्शन कर रहे हैं। कावेरी जल विनियमन समिति ने कर्नाटक को 28 सितंबर से 15 अक्तूबर तक 3000 क्यूसेक कावेरी जल छोड़ने के निर्देश दिए थे। कर्नाटक ने इस निर्देश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण में समीक्षा याचिका दायर की है। कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया ने इस निर्देश पर निराशा व्यक्त की है।
पिछले हफ्ते की शुरुआत में तमिलनाडु के सीएम स्टालिन ने कर्नाटक से अपर्याप्त कावेरी जल के कारण कुरुवई (धान) की खेती से पीड़ित डेल्टा किसानों को 13,500 रुपये प्रति हेक्टेयर का मुआवजा देने का वादा किया था।