प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत खुद को विश्वमित्र के रूप में देखता है और दुनिया देश को अपना मित्र कहती है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से हम कोरोना महामारी के दौरान दुनिया के साथ खड़े थे तो आज मुझे दुनिया को यह बताने की जरूरत नहीं है कि भारत आपका मित्र है, दुनिया स्वयं कहती है कि भारत हमारा मित्र है।
पीएम मोदी ने ये बातें रविवार को हैदराबाद से 50 किमी दूर स्थित कान्हा शांति वनम में एक कार्यक्रम में कहीं। उन्होंने कहा कि इतिहास साक्षी है कि जब-जब, जहां-जहां गुलामी आई, वहां सबसे पहले उस समाज की असली ताकत पर चोट की गई। उसके चेतना तत्व को तहस-नहस करने का प्रयास हुआ, उसके चैतन्य को नष्ट करने के लिए उसके सभी मान बिंदुओं को खत्म करना, ये प्रवृत्ति रही।
भारत को गुलाम बनाने वालों ने भी हमारी असली ताकत ज्ञान, ध्यान, योग, आयुर्वेद, ऐसी कई महत्वपूर्ण चीजों पर हमला बोला था और इसका देश को बहुत नुकसान उठाना पड़ा, लेकिन अब समय बदल रहा है। भारत भी बदल रहा है।
सांस्कृतिक विरासत को हर तरह से सशक्त बनाने की कोशिश की
पीएम ने कहा कि समृद्धि केवल धन दौलत से नहीं आती है बल्कि इसमें सांस्कृतिक उद्यम का भी उतना ही महत्व होता है। आज भारत आर्थिक, सामरिक और संस्कृति हर प्रकार के पुनर्जागरण के दौर में प्रवेश कर रहा है। पिछले 10 सालों में सरकार ने देश की सांस्कृतिक विरासत को हर तरह से सशक्त बनाने का प्रयास किया है, बात चाहे योग की हो या आयुर्वेद की, आज भारत की चर्चा नॉलेज हब के रूप में हो रही है।
आज सरकार लाभार्थियों तक पहुंच रही
पीएम ने कहा कि पहले लोगों को लाभ पाने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन आज सरकार लाभार्थियों तक पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि विकास का लाभ सभी तक पहुंचना चाहिए और कोई भी पीछे नहीं रहना चाहिए।
हमने ऐसी परंपरा बनाई, पुरस्कार स्वयं ही सम्मानित हो जाते हैं
पीएम ने कहा कि कमलेश डी पटेल ने जो काम मानवता के लिए किए हैं, वे वाकई अद्भुत हैं। उनके इस योगदान को पद्म पुरस्कार से सम्मानित करने का सौभाग्य हमारी सरकार को मिला। हमने पद्म पुरस्कारों की परंपरा ऐसी बनाई है कि पुरस्कार स्वयं ही सम्मानित हो जाते हैं।