तेलंगाना में भारतीय सेना के तीन जवानों समेत सात लोगों ने पुलिस ने गिरफ्तार किया है। मल्कजगिरी पुलिस कमिश्नर बी. सुमति ने बताया कि शनिवार को सात लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें सेना के तीन जवान भी शामिल हैं। इन सभी को सैन्य ठिकाने से हथियार चोरी करने के मामले में गिरफ्तार किया गया है। चोरी का मुख्य आरोपी, तेलंगाना के नागरकुर्नूल जिले के रहने वाले पूर्व हवलदार उप्पुथाला मल्लेश (37), को 11 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। उस पर 30 और 31 अगस्त की रात बोलारम स्थित 'कोट और बटालियन मैगजीन' से हथियार (एके-203 असॉल्ट राइफल और गोला-बारूद) चोरी करने का आरोप है। चोरी का सामान आरोपी ने नागरकुर्नूल में पिता के घर पर छिपाकर रखा गया था, उसे सुरक्षित बरामद कर लिया गया।
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पुलिस ने क्या कहा?
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों की जानकारी दी है। बयान के मुताबिक इसमें सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिसमें सेना के तीन मौजूदा जवान, पश्चिम बंगाल के दो लोग, मल्लेश का चचेरा भाई और उसका दोस्त शामिल हैं। पुलिस जांच के अनुसार, मल्लेश ने अन्य आरोपियों की मदद से बड़ी संपत्ति से लूटने के इरादे से यह अपराध किया था। इसमें किसी आतंकवादी या चरमपंथी संगठन से जुड़ाव का कोई सबूत नहीं मिला है।
आर्मी ने मल्लेश को क्यों निकाला?
मद्रास रेजिमेंट की 20वीं बटालियन में हवलदार के तौर पर काम करने वाले मल्लेश को अनुशासनहीनता और खराब स्वास्थ्य के कारण इस साल जून में समय से पहले सेवा से रिटायर कर दिया गया था। गिरफ्तार करने के बाद उसे अदालत में पेश किया गया। उसके बाद न्यायिक हिरासत में भेजा गया। कमिश्नर ने बताया कि जांच के दौरान पता चला कि मल्लेश पहले घरों में चोरी की घटनाओं में शामिल रहा था। उसने अपने चचेरे भाई और दोस्त के साथ मिलकर बैंक, ज्वैलरी शॉप और अमीर लोगों के यहां डकैती करने की योजना बनाई थी ताकि खूब पैसा कमाया जा सके। उसके चचेरे भाई और दोस्त आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे।
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कैसे किया खेल?
पुलिस ने बताया कि मल्लेश ने रेजिमेंट के तीन सेना के जवानों से भी संपर्क किया और उनकी मदद से 'कोट और मैगजीन' के ताले तोड़कर हथियार और गोला-बारूद चोरी किए। पूछताछ के दौरान मल्लेश ने कबूल किया कि 2022 में, जब उसकी बटालियन बैरकपुर, कोलकाता में तैनात थी, तो उसने पश्चिम बंगाल के रहने वाले दो लोगों से एक देसी बंदूक और एक जिंदा कारतूस खरीदा था। पुलिस ने बताया कि उन दोनों ने माना कि मल्लेश ने उनसे संपर्क किया था और पूछा था कि क्या वे सेना के चोरी हुए हथियार और गोला-बारूद खरीदेंगे और वे इसे खरीदने के लिए तैयार हो गए थे। हालांकि, इस गिरफ्तारी पर भारतीय सेना की ओर से कोई तुरंत प्रतिक्रिया नहीं आई।