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बिहार से आगे निकला यूपी, जीरो से कम अंक वाले भी बनेंगे शिक्षक

Sat, 25 Jun 2016 03:48 AM IST
हिमांशु गुप्ता/अमर उजाला, अलीगढ़
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शिक्षा का स्तर ‘जीरो ’ से भी नीचे गिर रहा है। बिहार में जिनको कुछ नहीं आता वह छात्र हाई स्कूल इंटर के टॉपर हो गए तो पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया। लेकिन उत्तर प्रदेश तो इससे भी दो कदम आगे निकल गया हैं।
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200 अंकों वाली प्रवेश परीक्षा में जो अभ्यर्थी एक नंबर तो दूर शून्य भी नहीं हासिल कर सके वह भी शिक्षक बनने की दहलीज पर पहुंच गए हैं।
लखनऊ विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित उत्तर प्रदेश की बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा में निगेटिव मार्क्स लाने वालों को भी बीएड में प्रवेश मिलने जा रहा है।

धर्म समाज डिग्री कॉलेज अलीगढ़ में शुक्रवार को पहले फेज के अंतिम दिन शेष बचे हुए अभ्यर्थियों की काउंसलिंग के दौरान अमर उजाला ने शिक्षक बनने की पहली सीढ़ी पार कर चुके युवाओं से बात की तो हकीकत सामने आ गई। किसी को स्नातक के विषय नहीं पता किसी के लिए बीएड का मतलब शिक्षामित्र बनना है।

नाम: रवेंद्र कुमार, मथुरा
प्रवेश परीक्षा में प्राप्तांक : -2
रैंक : 258198
सवाल - ग्रेजुएशन में  कौन से विषय थे
जवाब - डबल इंग्लिश, इकॉनोमिक्स, पॉल्टिकल साइंस
सवाल - पॉल्टिकल साइंस में क्या पढ़ाते हैं?
जवाब - विज्ञान और मैथ
सवाल- बीएड वाले किस क्लास तक के बच्चों को पढ़ाते हैं?
जवाब -  12वीं और बीए तक।
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नाम: स्वीटी, कासगंज
प्रवेश परीक्षा में प्राप्तांक : -6
रैंक - 259881
सवाल- ग्रेजुएशन में कौन से विषय थे?
जवाब - डबल इंग्लिश, होम साइंस, ज्योग्राफी।
सवाल- भारत कौन से महाद्वीप में है?
जवाब - उत्तर महाद्वीप।
सवाल- बीएड के बाद क्या बनते हैं?
जवाब- शिक्षामित्र।
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नाम : बॉबी कुमार, अलीगढ़
प्रवेश परीक्षा में प्राप्तांक : -1.34
रैंक - 257985
सवाल- ग्रेजुएशन किन विषयों से की है?
उत्तर- हिंदी, अंग्रेजी, इकॉनोमिक्स, सोशियलॉजी
सवाल- इकॉनोमिक्स की स्पेलिंग क्या होती है?
जवाब- नहीं पता।
सवाल- सोशियलॉजी कैसे लिखते हैं?
जवाब- नहीं पता।
नोट: इन सभी अभ्यर्थियों से बातचीत की वीडियो रिकॉर्डिंग अमर उजाला के पास सुरक्षित हैं।
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मुफ्त में डीडी बांट रहे दलाल

कांउसलिंग सेंटर के बाहर निजी कॉलेजों के दलालों का बोलबाला है। काउंसलिंग के लिए अभ्यर्थी को साढ़े पांच हजार रुपये का डिमांड ड्रॉफ्ट (डीडी) जमा करना है। दलाल अभ्यर्थियों को मुफ्त में डीडी बांट रहे हैं।

इसके बदले में वह अभ्यर्थियों को काउंसलिंग के दौरान अपने बताए गए कॉलेज को च्वाइस लॉक कराने को कहते हैं। ऐसे ही दो दलाल डीएस कॉलेज प्रशासन ने मंगलवार को पकड़ लिए। उन्हें हिदायत देकर वहां से भगा दिया गया।

निजी कॉलेजों की सीटें भरने का दबाव
सूबे में सभी राजकीय, एडेड और निजी कॉलेजों में 1 लाख 65 हजार से अधिक बीएड की सीटें हैं। इस वर्ष करीब ढाई लाख अभ्यर्थी प्रवेश परीक्षा में शामिल हुए हैं। तकरीबन 20 प्रतिशत अभ्यर्थी काउंसलिंग कराने नहीं आते।

शेष बचे करीब 2 लाख अभ्यर्थियों से ही सभी सीटें भरनी हैं। इस दबाव के चलते शून्य और उससे कम अंक वाले अभ्यर्थियों को भी काउंसलिंग में शामिल किया जाता है। ऐसे में शिक्षा का स्तर कुछ भी हो, इससे किसी को कोई मतलब नहीं है।

एक अभ्यर्थी एक लाख का
तय फीस के अनुसार दो वर्ष की बीएड की पढ़ाई में 5500 रुपये काउंसलिंग के दौरान लिए जाते हैं। इसके बाद दाखिले के दौरान पहली साल 46250 रुपये का डीडी महाविद्यालय के नाम बनता है। द्वितीय वर्ष में 30 हजार रुपये शुल्क महाविद्यालय और लेता है। ऐसे कुल 81 हजार 750 रुपये फीस निर्धारित है। इनमें 500 रुपये प्रवेश परीक्षा कराने वाले लखनऊ विश्वविद्यालय के खाते में जाते हैं। शेष 81 हजार 250 रुपये कॉलेज के होते हैं। इसके बाद क्लास में न आने, प्रैक्टिकल आदि के नाम पर 10 से 15 हजार रुपये अभ्यर्थियों से वसूल लिए जाते हैं। 


यह वाकई चौंकाने वाली बात है। बीएड प्रवेश परीक्षा के लिए न्यूनतम अंक प्रतिशत तय किया जाना चाहिए। लखनऊ विश्वविद्यालय ने सभी अभ्यर्थियों को काउंसलिंग में शामिल करने के निर्देश दिए हैं। हम उसी का पालन कर रहे हैं। 
''डॉ. ओपी बंसल, काउंसलिंग कंट्रोलर, डीएस कॉलेज अलीगढ़।''
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