सबरीमाला में प्रसाद में हलाल गुड़ के इस्तेमाल की खबरें निराधार हैं और लगाए गए आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है। यह जानकारी त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड (टीडीबी) ने गुरुवार को केरल उच्च न्यायालय को दी।
सबरीमाला के प्रसाद में हलाल गुड़ के इस्तेमाल को लेकर बवाल मचने के बाद सबरीमाला बोर्ड ने केरल हाईकोर्ट में अपना जवाब दायर किया। पठानमथिट्टा जिले के सबरीमाला में भगवान अयप्पा मंदिर का प्रबंधन करने वाले त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (टीडीबी) ने गुरुवार को केरल उच्च न्यायालय को बताया कि उसके द्वारा प्राप्त किए गए गुड़ की ‘पैकेजिंग’ पर पर ‘हलाल’ लिखा हुआ है क्योंकि इसकी आपूर्ति करने वाली महाराष्ट्र की एक फर्म से इसे अरब देशों को भी निर्यात करती है।
बोर्ड ने न्यायमूर्ति अनिल के नरेंद्रन और न्यायमूर्ति पीजी अजीत कुमार की पीठ से कहा कि वहां (गोदाम) से जरूरत के मुताबिक गुड़ को सबरीमला में मुख्य भंडार गृह तक पहुंचाया जाता है और वझीपाडु (प्रसाद) तैयार करने के बाद उसकी भी जांच की जाती है, फिर उसे वितरित किया जाता है या बेचा जाता है। अदालत ने इस विषय पर आगे की सुनवाई के लिए शुक्रवार की तारीख दी है, तब तक विशेष आयुक्त, सबरीमला की रिपोर्ट भी आ जाएगी।
एसजेआर कुमार नाम के एक श्रद्धालु की याचिका पर बोर्ड ने यह दलील दी है। उन्होंने अयप्पा मंदिर में प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं को दिए जाने वाले अरवण (गुड़ और चावल से बनी खीर) और अप्पम (चावल और गुड़ की टिक्की) तैयार करने के लिए ‘हलाल’ प्रमाणित गुड़ खरीदे जाने का विरोध किया है।
अधिवक्ता वी सजीत कुमार के मार्फत दायर याचिका में याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि हलाल प्रमाणित खाद्य सामग्री भगवान अयप्पा को चढ़ाये जाने के लिए सात्विक सामग्री नहीं है और इसलिए मंदिर प्रशासन के कार्य अत्यधिक अवैध हैं और संविधान के तहत प्रदत्त धार्मिक अधिकार का उल्लंघन करते हैं।
वहीं, बोर्ड ने याचिकाकर्ता के दावे का विरोध करते हुए अपने बयान में दलील दी कि रिट याचिका में लगाये गए आरोप पूरी तरह से झूठे, बेबुनियाद और सबरीमला में प्रसाद की बिक्री को रोकने के दुर्भावनापूर्ण इरादे से प्रेरित है।