टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) एन गणपति सुब्रमण्यम ने कहा है कि ‘मूनलाइटिंग’ यानी नौकरी के साथ दूसरे संस्थान के लिए काम करने को लेकर किसी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई उसका करियर बर्बाद कर सकती है और इसलिए, इस मुद्दे से निपटने के दौरान सहानुभूति दिखाना महत्वपूर्ण है। जब कोई कर्मचारी अपनी नियमित नौकरी के अलावा स्वतंत्र रूप से कोई अन्य काम भी करता है, तो उसे तकनीकी तौर पर ‘मूनलाइटिंग’ कहा जाता है।
प्रवेश स्तर के कर्मचारियों के लिए कई वर्षों से समान स्तर पर वेतन पैकेज के बारे में पूछे जाने पर सुब्रमण्यम ने कहा कि कंपनी मानती है कि युवा जॉइनर्स के लिए यह पैकेज पर्याप्त है। उन्होंने कहा कि कुछ टेस्ट को पास करने के बाद उनके पास यह संभावना होती है कि एक वर्ष के भीतर अपनी कमाई को दोगुना कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि एक कर्मचारी को काम पर रखने के बाद कंपनी छह महीने से अधिक समय तक उनकी ट्रेनिंग में निवेश करती है और इसके बाद ही कर्मचारी को एक प्रोजेक्ट पर रखती है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में लगभग 20-30 प्रतिशत कर्मचारियों ने परीक्षा उत्तीर्ण की है और अपने वेतन को दोगुना करने में सफल रहे हैं।
सुब्रमण्यम ने ‘मूनलाइटिंग’ के मुद्दे को वर्क फ्रॉम होम (डब्ल्यूएफएच) से भी जोड़ा, यह इशारा करते हुए कि जब एक कर्मचारी कार्यालय में होता है तो उससे जुड़ी बहुत सारी चिंताओं को ध्यान रखा जाता है। उन्होंने कहा कि एक कर्मचारी कार्यालय में उपलब्ध मेंटरशिप से सीख सकता है और यह उसे उच्च स्तर का कौशल हासिल करने में सहायक होता है, जो घर से काम करते समय संभव नहीं है।