मिलनसार और खुशमिजाज व्यक्तित्व, हमेशा होठों पर तैरती मुस्कान, हर किसी से पल भर में घुलमिल जाने वाली तारिषी की ढाका में आतंकियों ने गला रेतकर हत्या कर दी। इस्लामिक देश बंगलादेश में पैदा हुई और वहीं पली बढ़ीं, अमेरिका में एमबीए कर रही तारिषी पर परदेस के माहौल का कोई असर नहीं पड़ा।
अपने देश की माटी और संस्कारों से उसे लगाव था, जब भी फीरोजाबाद आती तो पल भर सबसे घुलमिल जाती थीं।
अमेरिका में ब्रेकेले यूनीवर्सिटी से एमबीए कर रही तारिषी जैन छुट्टियों में अमेरिका से ढाका गई थीं। जिस कैफे पर हमला किया गया, वह उनके घर के पास ही है। शुक्रवार की शाम को वह अपने मित्रों के साथ उसी कैफे में मौजूद थी।
संजीव जैन के भाई राकेश मोहन जैन ने बताया कि रात 12 बजे ढाका से उनके भाई (संजीव जैन) का फोन आया था कि जिस कैफे पर हमला हुआ है और उसमें तारिषी फंस गई है। इसके बाद हम रात भर सो नहीं पाए, तारिषी की मौसी एनी जैन ने बताया कि उन्हें भी फोन पर बताया गया कि जिस कैफे को आतंकवादियों ने घेर रखा है, उसके बाथरूम में तारिषी भी है।
हमले से बचने के लिए वह बाथरूम में घुस गई थी। सुबह पता चला कि हमारी लाड़ली हमले में मारी गई।
सुहानगर निवासी तारिषी के पिता संजीव जैन कई वर्ष पहले ढाका चले गए थे। वहां उनका गारमेंट्स का कारोबार है। ढाका में ही तारिषी का जन्म हुआ था। पिछली दीपावली पर तारिषी अपनी माता तूलिका जैन, पिता और बड़े भाई संक्षिप्त के साथ फीरोजाबाद आई थी। तीन दिन परिवार यहां रुका था।
परिवार के लोगों और पड़ोसियों ने बताया कि वह काफी मिलनसार और खुश मिजाज थी। चेहरे से हर वक्त मुस्कान झलकती रहती थी। विदेश में रहते हुए भी उसे अपने देश से काफी लगाव था। तारिषी के सबसे छोटे चाचा अजीत जैन खुद को संभाल नहीं पा रहे थे।
उन्होंने रुंधे गले से बताया कि तारिषी उन्हें सबसे अधिक प्यारी थी। उसका फोन अक्सर उनके पास आया करता था।