भाजपा के अवध प्रांत के एक नेता के अनुसार, चुनाव प्रचार के दौरान हम प्रदेश की शासन-व्यवस्था के साथ-साथ कश्मीर में केंद्र सरकार द्वारा किये जा रहे कार्यों को ही बड़ा मुद्दा बनाते थे। लेकिन उत्तर प्रदेश से लेकर कश्मीर तक बिगड़े हालात ने अब हमें अपने चुनावी मुद्दे तय करने में मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। नेता के मुताबिक, लोग यह बात अच्छी तरह से समझ रहे हैं कि केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 को समाप्त कर एक बड़ा काम किया है, लेकिन बदले हालात में आतंकी घटनाओं की दोबारा वापसी से लोगों में खासी नाराजगी देखी जा रही है। लोग किसी भी कीमत पर इस आतंक का खात्मा चाहते हैं।
आरएसएस के वरिष्ठ नेता राममाधव ने कहा है कि घाटी में टारगेट किलिंग होती रही है। इस दौर में भी यही काम करके आतंकी घाटी की शांति प्रक्रिया को पटरी से उतारना चाहते हैं। यह उनकी हताशा का ही परिणाम है। इससे यह साबित होता है कि घाटी में वापस आती शांति को देखकर वे बौखला गए हैं और इसी बौखलाहट में इस तरह की हरकतों को अंजाम दे रहे हैं।
पाकिस्तान और आतंकियों को अब जनता का समर्थन नहीं
जम्मू-कश्मीर भाजपा के लीगल सेल के इंचार्ज अधिवक्ता भानु सिंह जसरोटिया ने अमर उजाला से कहा कि अनुच्छेद 370 की समाप्ति से घाटी की स्थिति में तेजी से बदलाव हो रहा था। एक बार फिर घाटी का पर्यटन वापस लौट रहा था, जिससे लोगों में कामकाज-व्यापार के सामान्य होने की उम्मीद पैदा हो रही थी। लेकिन आतंकियों ने खूनी खेल शुरू कर केंद्र सरकार की मुहीम को चोट पहुंचाने की कोशिश की है। इससे पर्यटन और व्यापार को नुकसान हुआ है, लेकिन जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान और आतंकियों की छवि बेहद नकारात्मक बनी है। जनता का उनके प्रति कोई समर्थन शेष नहीं बचा है।
भानु सिंह जसरोटिया ने बताया कि आम नागरिकों और मजदूरों को निशाना बनाकर आतंकी केंद्र सरकार की उसी रणनीति को असफल बनाना चाहते हैं, जिसके अंतर्गत वह पूरे देश के नागरिकों को जम्मू-कश्मीर में आने-जाने को अन्य जगहों की तरह आसान बनाना चाहती है। केंद्र सरकार की इस नीति का विरोध कर कुछ कश्मीरी नेताओं और अलगाववादियों ने अपनी सोच उजागर कर दी है।